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Sunday, June 3, 2012

अचूक असरकारी सरल वास्तु टिप्स

* घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। 
* ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें ताकि सूर्य की जीवनदायिनी किरणें घर में प्रवेश कर सकें।
* भोजन बनाते समय गृहिणी का हमेशा मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे भोजन सुपाच्य और स्वादिष्ट बनता है। साथ ही पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।
* जो बच्चे में पढ़ने में कमजोर हैं, उन्हें पूर्व की ओर मुख करके अध्ययन करना चाहिए। इससे उन्हें लाभ होगा।
*जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है, उन्हें वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के कमरे में रहना चाहिए। इससे उनका विवाह अच्छे और समृद्ध परिवार में होगा।
* रात को सोते वक्त व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है साथ ही व्यक्ति की पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है।
* घर में कभी-कभी नमक के पानी से पोंछा लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
*घर से निकलते समय माता-पिता को विधिवत (झुककर) प्रणाम करना चाहिए। इससे बृहस्पति और बुध ठीक होते हैं। इससे व्यक्ति के जटिल से जटिल काम बन जाते हैं।
* घर का प्रवेश द्वार एकदम स्वच्छ होना चाहिए। प्रवेश द्वार जितना स्वच्छ होगा घर में लक्ष्मी आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
* प्रवेश द्वार के आगे स्वस्तिक, ॐ, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिह्नों को उपयोग अवश्य करें।
* प्रवेश द्वार पर कभी ‍भी बिना सोचे-समझे गणेशजी न लगाएं। दक्षिण या उत्तरमुखी घर के द्वार पर ही गणेशजी लगाएं।
* विवाह पत्रिका कभी भूलकर भी न फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है।
* घर में देवी-देवताओं की ज्यादा तस्वीरें न रखें और शयन कक्ष में तो बिलकुल भी नहीं।
* शयन कक्ष में टेलीविजन कदापि न रखें क्योंकि इससे शारीरिक क्षमताओं पर विपरीत असर पड़ता है।
* दफ्तर में काम करते समय उत्तर-पूर्व की ओर मुख करके बैठें तो शुभ रहेगा, जबकि बॉस (कार्यालय प्रमुख) का केबिन नैऋत्य कोण में होना चाहिए। 
* घर के भीतर शंख अवश्य रखें। इससे बजाने से 500 मीटर के दायरे में रोगाणु नष्ट होते हैं।
* पक्षियों को दाना खिलाने और गाय को रोटी और चारा खिलाने से गृह दोष का निवारण होता है।

अगर आपको सुंदर पत्नी चाहिए तो जरुर करें ये काम


सभी युवकों की इच्छा होती है कि उनकी जीवन संगिनी सुंदर व सुशील हो। जो पूरे परिवार की चहेती बने और सबका मन जीत ले। उसका संपूर्ण व्यक्तित्व सुंदरता का आइना हो। क्या आप भी इन्हीं गुणों से युक्त जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं तो दुर्गासप्तशती के अर्गला स्त्रोत का 24 वां श्लोक आपकी इस समस्या का तुरंत निदान कर सकता है। यह मंत्र बहुत चमत्कारी है तथा भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करता है।



मंत्र


पत्नीं मनोरमां देहि  मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।



कैसे करें जप?

सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इस मंत्र का जप करें। इस मंत्र की प्रतिदिन 5 माला जप करने से सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है। यदि जप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।
 

ये हैं बुरी नजर से बचाने के सरल व अचूक उपाय

हम अक्सर यह सुनते हैं कि बच्चे को बुरी नजर लग गई या नजर लगने से दुकान बंद हो गई। नजर किसी भी सुंदर या अच्छी चीज को लग सकती है जैसे- सुंदर बच्चे को, दुकान को, घर को आदि। ऐसे में बुरी नजर से मुक्ति पाने के लिए टोने- टोटके ही अपनाए जाते हैं। अगर आपके घर के किसी सदस्य या आप पर बुरी नजर का प्रभाव है तो नीचे लिखे टोटके अपनाकर बुरी नजर से मुक्ति पा सकते हैं।

उपाय

- नारियल को काले कपड़े में बांधकर सिलकर घर से बाहर लटका दें तो घर पर बुरी नजर का प्रभाव नहीं पड़ता।

- थोड़ी सी साबुत फिटकरी लेकर नजर लगी दुकान पर से 31 बार उसारें। फिर किसी चौराहे पर जाकर उसे उत्तर दिशा में फेंककर पीछे देखें बिना लौट जाएं। दुकान पर लगी नजर दूर हो जाएगी।

- थोड़ी सी राई, नमक, आटा और सात सूखी लाल मिर्च लेकर नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिर पर से सात-बार घुमाकर आग में डाल दें। नजरदोष होने से मिर्च जलने पर गन्ध नहीं आएगी।

- घर के निकट वृक्ष की जड़ में शाम को थोड़ा सा कच्चा दूध डाल दें। फिर गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। नजरदोष दूर हो जाएगा।

- मंगलवार को हनुमान मन्दिर जाकर हनुमान जी के कन्धे का सिंदूर लाकर लगाने से बुरी नजर का प्रभाव दूर हो जाता है।

- पुराने कपड़े की सात चिंदियां लेकर सिर पर से 21 बार उसारकर आग में जलाने से बच्चे को लगी नजर समाप्त हो जाती है।

- पीली कौड़ी में छेद करके बच्चे को पहनाने से उसे नजर नहीं लगती।

- नए मकान की चौखट पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधने से उस पर बुरी नजर नहीं लगती है।

केवल 11 दिनों तक करें ये उपाय, धीरे-धीरे मिलने लगेगा ज्यादा पैसा.


बढ़ती महंगाई के चलते अधिकांश लोगों को पैसों की तंगी झेलना पड़ रही है। जिस प्रकार वस्तुओं की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है उसी प्रकार व्यक्ति की आय में कमी हो रही है। ऐसे में आर्थिक संकट को झेलना पड़ता है। इस प्रकार की परेशानियों से निजात पाने के लिए मेहनत के अलावा भाग्य का साथ भी जरूरी है।

भाग्य का साथ प्राप्त करने के लिए शास्त्रों के अनुसार कई उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से सकारात्मक फल प्राप्त होने लगते हैं। इन्हीं उपायों में से एक है 11 दिनों तक लगातार शिवजी का रुद्राभिषेक कराना। शिवजी का पूजन सभी परेशानियों और कष्टों का सटीक उपाय है। महादेव अपने भक्तों के सारे दुखों को दूर करते हैं।

11 दिनों तक लगातार शिव मंदिर में किसी श्रेष्ठ पंडित द्वारा शिवलिंग का पूजन कराएं। शिवजी के रुद्राभिषेक से सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा मिल जाता है। यह उपाय नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इन 11 दिनों में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो यह ध्यान रखें। इसके साथ इन दिनों में अधार्मिक आचरण से भी बचें। विधिवत रूप से 11 दिनों तक शिवजी का रुद्राभिषेक होने पर शिवजी की कृपा प्राप्त हो जाती है।

Friday, June 1, 2012

राशि के अनुरूप हो रहे हैं दीवारों पर रंग

वास्तुशास्त्र विशेषज्ञों अनुसार राशि के अनुरूप रंगों का चयन। 
* गृहस्वामियों को लुभा रही है वॉल पेटिंग। 
* दो से अधिक रंगों का लुक एकसाथ। 

लोग जहां मकानों के बाहरी दीवारों पर गहरे एवं चटकीले रंगों को पसंद कर रहे हैं वहीं कमरों की दीवारों पर दो या दो से अधिक रंगों के लुक को अपना रहे हैं। कमरे की एक दीवार पर ऑरेंज तो दूसरी पर ब्लू और तीसरी अन्य रंगों से पुतवाने के प्रति रुचि ले रहे हैं। साथ ही वॉल पेटिंग भी गृहस्वामियों को लुभा रही है। आकर्षक लुक के लिए अधिकांश गृहस्वामी आर्किटेक्ट की सलाह पर रंग चुन रहे हैं।

राशि के अनुरूप रंगों का चय
ज्योतिषाचार्य जी.एम. हिंगे एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. एचसी जैन बताते हैं कि कलर के लिए जागरुक लोग सलाह लेते हैं। ताकि वे जन्म पत्रिका के हिसाब से या उनकी राशि के अनुरूप सही रंग का चयन कर अपने मकान को पुतवा सकें। 

अधिकांश मकान की बाहरी दीवारों पर गहरे और वेदरप्रुफ रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे प्रदूषण के कारण मकान की बाहरी दीवार जल्दी फीकी नहीं पड़ती। 

वहीं दूसरी और मकान के अंदर की दीवारों पर लोग हल्के रंगों का उपयोग करते हैं जो वास्तुशास्त्र के हिसाब से भी उचित है। क्योंकि हल्के रंगों से मन शांत और स्थिर रहता है। व्यवहार में उग्रता नहीं आती। जिन लोगों के एक ही घर में 2 गृहस्वामी होते हैं वे अपने मकान की अंदर की दीवारों को दो रंगों से पुतवाते हैं।

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न्यू ट्रेंड के चलते लोग खास तरह के रंगों को पसंद कर रहे हैं। टेलीवीजन पर आने वाले विभिन्न सीरियलों में मकानों के रंग गहरे और चटकीले दिखाई देते हैं, जो दर्शकों को आकर्षित करते हैं। इसलिए लोग भी अपने मकान की दीवारों पर गहरे और चटकीले वेदरप्रुफ रंग पुतवाना पसंद करते हैं। लोग वास्तुशास्त्र विशेषज्ञों से भी रंगों के बारे में चर्चा करते हैं। 

इन रंगों का करें चयन आदर्श है : 

* ड्राइंग रूम : पिंक, क्रीम या ब्राऊन
* बेडरूम : आसमानी, पिंक, हल्का हरा
* डायनिंग रूम : पिंक, आसमानी, हल्का हरा
* स्टडी रूम : पिंक, ब्राऊन, आसमानी
* किचन : सफेद सर्वश्रेष्ठ। 

* राशिनुसार रंग कैसे हो : 

मेष : लाल, मेहरून, ईंट जैसा 
वृषभ : सफेद, चमकीला, हरा, बादामी 
मिथुन : गहरा हरा, गहरा नीला, पीच, फिरोजी
कर्क : चांदी, सफेद, आसमानी, परपल 
सिंह : पीले रंग के हर शेड्स, जामुनी, नारंगी 
कन्या : गुलाबी, हल्का हरा, रामा ग्रीन, सी ग्रीन 
तुला : सफेद, बेबी पिंक, ब्राउन, मरीन ब्लू 
वृश्चिक : हल्का लाल, लाइट मेजेंटा, पिकॉक ब्लू 
धनु : लाइट येलो, हल्दी जैसा पीला, पीच 
मकर : ग्रे, डार्क ऑरेंज, ब्राऊन, लाइट ब्लू 
कुंभ : ब्लू के सभी शेड्स, खिलता पिंक, मेटल शेड 
मीन : ऑरेंज के सभी शेड्स, हल्का बैंगनी, डार्क बादामी

गृह निर्माण में रखें वास्तु शास्त्र का ध्यान

प्रत्येक परिवार की पहली आवश्यकता होती है, अपना घर। मध्यम वर्ग इस सपने को संजोने के लिए जीवन भर संघर्ष करता है। जिस समय यह सपना सच होने जा रहा हो, तो हमें वह घर पूर्ण रूप से समृद्धि दें, इसका ध्यान रखना चाहिए। अत: वास्तु के अनुसार गृह निर्माण करवाना चाहिए। 

किसी भी प्लॉट या भूमि पर गृह निर्माण करते समय यह ध्यान रखें कि भूमि (प्लॉट) के अग्नि कोण में पाक गृह (रसोई गृह), दक्षिण में शयन गृह, नैऋत्य कोण में अस्त्र-शस्त्रागार, पश्चिम में भोजन करने का गृह, वायव्य कोण में धन रखने का गृह, ईशान में देवालय एवं उत्तर में जल रखने का गृह रखें तथा उत्तर-पूर्व के मध्य बाथरूम होना चाहिए। इसी प्रकार

दूध, दही, घी, सिरका, अचार का स्थान रसोई के बगल में होना चाहिए। श्रृंगार एवं औषधि सामग्री शयन गृह के बगल में होना चाहिए। विद्यार्थियों के पढ़ने का कमरा देवालय के बगल में होना चाहिए।

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घर के आस-पास बड़, पीपल, इमली, कैथ, नींबू, कांटे वाले एवं दूध वाले वृक्ष नहीं होना चाहिए। इस वृक्षों के घर के आस-पास होने से धन की हानि होती है। 

कुआं एवं जल का स्थान मुख्य द्वार से पूर्व ईशान, उत्तर अथवा पश्चिम में होने से धन प्राप्त होता है। सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है। 

अग्निकोण में संतान हानि, दक्षिण में गृहिणी का नाश, नैऋत्य कोण में गृह मालिक का नाश एवं वायु कोण में भय, चिंता बनी रहती है। 

भवन में स्तंभ लगाने की आवश्यकता हो, तो स्तंभ सम संख्या में लगवाना चाहिए। इनकी संख्या यदि विषम हो, तो अशुभ फल देते है। 

पूर्ण रूप से उपरोक्त विधि को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण करने से घर में सुख-समृद्धि, यश, वैभव एवं शांति प्राप्त होती है।

श्रेष्ठ होती है हल्के कलर की स्टडी टेबल

* टेबल हमेशा आयताकार होना चाहिए, गोलाकार या अंडाकार नहीं होना चाहिए। 

* टेबल के टॉप का रंग सफेद, दूधिया या क्रीम श्रेष्ठ है या अन्य रंग फीके हल्के कलर हों तो श्रेष्ठ है। प्लेन ग्लास भी रख सकते हैं। 

* टेबल पर अध्ययन करते समय विषय से संबंधित पुस्तकें व आवश्यक इंस्ट्रूमेंट ही रखें। 

* बंद घड़ी, टूटे-फूटे व बंद पेन, धारदार चाकू, हथियार व औजार कदापि नहीं रखें। 

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* कम्प्यूटर टेबल पूर्व मध्य या उत्तर मध्य में रखें। ईशान में नहीं रखें। 

* अध्ययन टेबल व कुर्सी के ऊपर सीढ़ियां, बीम, कॉलम व डक्ट, टांड नहीं हों। 

* स्वीच बोर्ड आग्नेय या वायव्य में रखें। ईशान पर नहीं हों। 

* अध्ययन कक्ष के मंदिर में सुबह-शाम कपूर या शुद्ध घी का दीपक व हल्की खुशबू की अगरबत्ती अवश्य लगाएं। 

* भवन का ईशान कोण घटा-कटा व बढ़ा हुआ नहीं हो एवं सीढ़ियां शौचालय एवं रसोई नहीं हो व मास्टर शयन कक्ष नहीं हो, साथ ही अनुपयोगी सामान, स्टोर, सेप्टिक टैंक व वृक्ष नहीं हों।

Thursday, May 31, 2012

उपाय: बदल देंगे आपकी किस्मत, पैसों की तंगी होगी दूर

हर इंसान अपने दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना चाहता है लेकिन दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं होता। क्योंकि जब समय बुरा होता है तो साया भी साथ छोड़ देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो नीचे लिखे उपाय करें। ये उपाय आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देंगे।

उपाय
1- नए कार्य, व्यवसाय, नौकरी, रोजगार आदि शुभ कार्यों के लिए जाते समय घर की कोई महिला एक मुठ्ठी काले उड़द उस व्यक्ति के ऊपर से उतार कर भूमि पर छोड़ दे तो हर कार्य में सफलता मिलेगी।
2- गरीब, असहाय, रोगी व किन्नरों की सहायता दान स्वरूप अवश्य करें। यदि संभव हो तो किन्नरों को दिए पैसे में से एक सिक्का वापस लेकर अपने कैश बॉक्स या लॉकर में रखें। इससे बहुत लाभ होगा।
3- काली हल्दी की एक गांठ शुभ मुहूर्त में प्राप्त कर अपने घर में, व्यवसायी अपने कैश बॉक्स में तथा व्यापारी अपने गल्ले में रखें।
4- रवि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बहेड़े की जड़ या एक पत्ता तथा शंखपुष्पी की जड़ लाकर घर में रखें। चांदी की डिब्बी में रखें तो और भी शुभ रहेगा।
5- बरगद(बड़) के पत्ते को गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें।
6- घर के मुख्य द्वार के ऊपर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं कि उनका मुख घर के अंदर की ओर रहे। उस पर सुबह दूर्वा अवश्य अर्पित करें।
7- धन संबंधी कार्य सोमवार एवं बुधवार को करें।

एक रात में दूर पैसों की समस्या..


पैसों के लिए इंसान क्या नहीं करता। वह दिन-रात मेहनत करता है। आवश्यकता से अधिक श्रम करता है फिर भी धन की पूर्ति नहीं हो पाती। जितना भी धन आता है उसे कम ही लगता है। ऐसे में धन के अभाव में कई बार इंसान अवसादग्रस्त भी हो जाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके यहां धन-संपत्ति की कोई कमी न हो तो यह टोटका करें-

टोटका

शुक्ल पक्ष की तृतीया की रात्रि को अपने बाईं ओर शिवलिंग रखें और एक छोटा सा मिट्टी का दीपक तेल से भरा हुआ रखें। दीपक को जला लें और लौ पर नजर रखते हुए दाहिने हाथ से मूंगे की माला से इस मंत्र का जप करें। एक ही रात में 51 माला मंत्र जप होना आवश्यक है।


मंत्र

ऊँ श्रं सिद्धेश्वराय लं महालक्ष्मी वं वश्यमानाय फट् ।

मंत्र जप के बाद उस दीपक को साधक अपने घर में रखें। धन प्राप्ति के लिए यह बहुत ही अद्भुत प्रयोग माना जाता है। यह उपाय धन संबंधी आपकी सभी मनोकामना पूरी करता है।

शनिवार को पीपल के नीचे बोलें यह छोटा-सा मंत्र..नहीं रहेगी पैसों की कमी

हिन्दू धर्म मान्यताओं में ग्रह-नक्षत्र भी साक्षात देवता माने जाते हैं। प्रतिदिन सूर्य-चंद्र का प्रभाव कुदरत व मानव जीवन पर प्रत्यक्ष देखा भी जाता है। इसी तरह अन्य ग्रह-नक्षत्रों का जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव सुख-दु:ख नियत करने वाला माना गया है। इसलिए नवग्रह पूजा या दोष शांति का कामनासिद्धि के लिये विशेष महत्व बताया गया है। 

खासतौर पर ज्योतिष शास्त्रों में इन ग्रह-नक्षत्रों की चाल और दृष्टि सांसारिक जीवन में लाभ-हानि का कारण मानी गई है। नवग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु का अच्छा-बुरा असर जीवन में दरिद्रता या ऐश्वर्य को नियत करने वाला माना गया है। 

यही कारण है कि शास्त्रों में ग्रह उपासना लिए एक ऐसा उपाय भी बताया गया है, जो सभी ग्रह दोषों से मुक्त करने के साथ उनके बुरे असर से मिलने वाले रोग, दु:ख, दरिद्रता या नाकामियों को दूर कर जीवन भर ग्रह पीड़ा से मुक्त रखने वाला भी होता है। 

यह उपाय है हर शनिवार की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ विशेष ग्रह पीड़ा मुक्ति मंत्र का स्मरण। देव वृक्ष पीपल की पूजा ग्रह दोष व दरिद्रता का अंत करने वाली मानी गई है। जानिए इससे जुड़ी आसान विधि - 

- शनिवार की शाम पीपल की जड़ में गाय का दूध मिला जल, चंदन व काले तिल अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं। 

- पीपल के नीचे कुश आसन पर बैठ गोघृत का दीप व धूप जलाएं और नीचे लिखें मंत्र विशेष का 108 बार रुद्राक्ष या चन्दन के दानों की माला से जप करें। इस मंत्र में अमुक शब्द के स्थान पर ग्रह पीड़ित परिजन, स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति का नाम लें। 

ॐ नमो भास्कराय (अमुक) सर्व ग्रहणां पीड़ा नाश कुरु कुरु स्वाहा। 

- मंत्र जप के बाद त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश की आरती कर मंगल की कामना करें।

Wednesday, May 30, 2012

कैसे दूर करें फ्लैट के वास्‍तु दोष?

1- यदि आपके घर या फलैट का मुख्यद्वार लिप्ट के सामने हो तो वास्तु के अनुसार इसे अशुभ माना जाता है। क्योंकि लिप्ट का दरवाजा बार-बार खुलता व बन्द होता है। यह घर के सदस्यों के भाग्य एंव करियर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिससे उनके करियर में ठीक से प्रगति नहीं हो पाती है।

उपाय-
1: घर के मुख्यद्वार की दहलीज को दो इंच उची करें।
2: द्वार पर बाहर की ओर अष्टकोणीय दर्पण लगाने से वास्तु दोष से राहत मिलती है।

2- यदि आपके मकान या फलैट का मुख्यद्वार सींढियों के उपर समान तल पर स्थित हो तो, यह अशुभता का संकेत है। ऐसी स्थिति में घर का धन एंव मान-सम्मान लगातार कम होने लगता है। घर के मुखिया को अथक परिश्रम करने के बावजूद भी फल नहीं मिलता है।

उपाय-
1: घर के मुख्यद्वार के बाहर सूर्यास्त से 1 घंटा पहले चार बत्तियों वाला दीपक जलायें।
2: घर के मुख्यद्वार के उपर सूर्य भगवान की तांबे की मूर्ति स्थापित करें।

3- यदि घर का मुख्यद्वार सींढियों के नाचे समान तल पर हो तो, इसे भी वास्तु के अनुसार अशुभ माना जाता है। ऐसे घर या फलैट में घर का स्वाती अस्वस्थ्य रहेगा जिसके कारण उसका किसी कार्य में मन नहीं लगेगा।

उपाय- आप-अपने घर की दहलीज को दो इंच उपर उठायें जिससे सामने की सीढि़यों का अशुभ प्रभाव आपके परिवार पर नहीं पड़ेगा।

इस देवी मंत्र से मांगे मन्नत..जल्द मिलेगी खुशखबरी

दुर्गा यानी मातृशक्ति की पूजा और स्मरण का भाव यही है कि मानसिक, शाब्दिक वैचारिक दोषों को पहचानें और बचें। ये दुर्गुण व्यावहारिक जीवन में शत्रु की तरह या उससे भी अधिक कठिनाईयों और परेशानियों का कारण बनते हैं। 

हिन्दू धर्म में शुक्रवार देवी पूजा से शक्तियों के बूते सुख और सफलता की कामना को पूरी करने के लिए शुभ दिन माना जाता है। यह तिथि शत्रु नाश और आक्रमण के लिए भी शुभ बताई गई है। इसमें प्रतीकात्मक और सकारात्मक भाव से यही सीख है कि अपने दोष रूपी शत्रुओं पर बुद्धि और संयम से विजय पाएं, न कि हिंसा भाव को जीवन में उतारें। 

अगर आप भागदौड़ भरे जीवन में देवी उपासना के बड़े विधानों का पालन न कर पाएं, तो शास्त्रों में ऐसे छोटे-छोटे उपाय भी है, जो कम समय लेकर शुभ फलदायी और कामनापूर्ति करते हैं। जानिए देवी उपासना का ऐसा ही आसान उपाय - 

यह आसान उपाय है - शुक्रवार को माता की उपासना में विशेष मंत्र के साथ देवी को प्रिय कुछ फूलों का अर्पण कर मन्नत मांगना। माना जाता है कि मंत्र व फूल विशेष चढ़ाकर मात कृपा से मनोकामना शीघ्र पूरी होती है और सुखों से झोली भर जाती है। 

- देवी उपासना के लिए पवित्र भावों के संकल्प के साथ सुबह स्नान कर किसी देवी मन्दिर में नीचे लिखे देवी मंत्र से देवी का ध्यान कर देवी की पूजा में लाल चंदन, लाल अक्षत, लाल वस्त्र, सुहाग की वस्तुएं और लाल फूल अर्पित करें -

ऊँ अम्बे अम्बिकेम्बालिके न मा नयति कश्चन्।

ससत्यश्वक: सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीम्।। 

हेमाद्रितनयां देवी वरदां शङ्करप्रियाम्।

लम्बोदरस्य जननीं गौरीमावाहयाम्यहम्।। 

- देवी को प्रिय लाल फूलों के अलावा नीचे बताए कुछ फूलों को विशेष रूप से चढ़ाते हुए मन्नत मांगे - 

- चमेली के सफेद फूल, सफेद कमल, अशोक, चंपा, मौलसिरी, कनेर, आक, शंखपुष्पी। शिव को चढ़ाए जाने वाले सारे फूल भी देवी को चढ़ाए जा सकते हैं। 

- देवी की पूजा के बाद मौसमी फल या पकवानों का भोग लगा घी के दीप से माता की आरती करें। अंत में दोष और त्रुटियों के लिए क्षमा मांग मनोरथ पूर्ति में आने वाली बाधाओं से रक्षा की कामना करें।  

Sunday, May 27, 2012

बुधवार को करें यह उपाय, हर काम में मिलेगी सक्सेस


 यदि आपकी मनोकामनाएं पूरी नहीं हो रही है या बनते काम बिगड़ रहे हैं तो उसके लिए बुधवार को नीचे लिखा उपाय करें। आपकी हर इच्छा पूरी होने लगेगी और हर काम में सफलता मिलने लगेगी।

 उपाय--किसी भी बुधवार को सूर्य की ओर मुख करके नमस्कार करें। इसके बाद कच्चा सूत लेकर उस पर नीचे लिखा मंत्र पढ़ते हुए सात गठान लगाएं। अब आप उस सूत को तावीज में भरकर पहन लें। अब प्रति बुधवार को यह तावीज निकालकर धूप-दीप दिखाकर पुन: धारण कर लिया करें। इस ताबीज को पहनकर आप जिस किसी भी कार्य को करने जाएंगे उसमें सफलता अवश्य मिलेगी। आपकी हर इच्छा पूरी होगी।
मंत्र
ऊँ गं गणपतये नम:

सोमवार को करें ये उपाय, लकवा भी होने लगेगा ठीक


भगवान शंकर आरोग्य के देवता है यानी जो भी व्यक्ति विधि-विधान से भगवान शंकर की पूजा करता है बीमारियां उसके पास नहीं फटकती। किसी भी तरह की बीमारी भगवान शिव की कृपा से ठीक हो सकती है। सोमवार के दिन यदि किसी रोग मुक्ति के लिए उपाय किया जाए तो और भी शीघ्र फल मिलता है। यदि कोई व्यक्ति लकवे से पीडि़त है तो यह उपाय करें-

उपाय

सोमवार के दिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सुबह भगवान शंकर के मंदिर में जाएं और उन्हें आंक के पत्ते की माला बनाकर अर्पित करें। थोड़ी देर मंदिर में ही बैठें और ऊँ नम: शिवायं मंत्र का जप करें। इसके बाद वह माला निकाल लें और रोग मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। वह माला लकवा ग्रस्त व्यक्ति को सूंघाएं तथा उन पत्तों को पीसकर लकवा प्रभावित अंग को लगाएं। यह प्रक्रिया हर सोमवार को करें। कुछ ही दिनों में आप इसका प्रभाव देखेंगे।

सोया भाग्य जगाने वाले चार तावीज

सोया भाग्य जगाने वाले चार तावीज


इनमें से कोई भी यंत्र लिखने के बाद धूप-दीप से पूजा करके तावीज में रखकर बांह अथवा गले में बांधें। भाग्य जगाने का  तांत्रिक टोटका सोलह खाने के इस  तांत्रिक यंत्र को एक पर्याप्त बडे कागज पर अष्टगंध से लिखकर इसकी धूप-दीप से पूजा करें। पूरे भक्ति भाव से इसे सीसे में मढवाकर पूजा स्थल में रखें और अन्य देवों के साथ इसकी भी नित्य पूजा करें। यह बहुत शाक्तिशाली यंत्र है परन्तु महिलाएं और नित्य पूजा न करने वाले पुरूष इसका प्रयोग न करें, इसकी प्रात: काल नित्य धूप-दीप से पूजा करने पर ही यह अपना प्रभाव दिखला पाता है।

 

शांति, खुशियों के लिए तावीज
 

किसी शुभ मुहूर्त में निम्नलिखित यंत्र की रचना करनी चाहिए। इसके लिए भोजपत्र का अनार या चमेली की कलम द्वारा लौंग व कपूर के पानी में यंत्र लिखें और धूप, दीप, नैवेद्य से पूजा करें। फिर यंत्र को मोडकर चांदी या तांबे के तावीज में रखकर, दाहिने हाथ में धारण करें। सुख, सौभाग्य, संपदा और मानसिक शांति तथा उत्साह व प्रसन्नता की वृद्धि के लिए वह तावीज बहुत श्रेष्ठ है। 

 

सम्मान, सफलता दिलाने वाला गंडा
 

इस सुलेमानी नक्श अर्थात यंत्र को अनार की कलम से, अष्टगंध स्याही से भोजपत्र पर लिखकर, गुग्गल की धूनी देकर और तांबे के तावीज में बंद करके अपनी बांह अथवा कमर में बांध लें। तदुपरांत निर्द्वन्द्व होकर अपने कार्य हेतु चले जाएं। अवश्य ही सफलता मिलेगी, और भाग्य की वृद्धि होगी। किसी अफसर या बडे व्यक्ति के पास जाना हो, उससे कोई जरूरी काम लेना हो तो इस तावीज के प्रभाव से वह काम जरूर पूरा होगा। मुकदमे आदि में विजय मिलेगी। मान सम्मान बढेगा और सब मनोरथ सफल होंगे।
 

 


कोर्ट-कचहरी में जीत का तांत्रिक तावीज


रवि पुष्य या किसी शुभ मुहूत्तü में पूरब की ओर मुंह करके और स्वच्छ वस्त्र धारण करके, सफेद आसन पर विराजमान होकर अनार की कलम के द्वारा अष्टगंध स्याही से भोजपत्र पर उपर्युक्त यंत्र की रचना करें। दीप-धूप से पजून करें और चांदी के तावीज में बंद करके, तावीज दाहिनी भुजा पर अथवा गले में बांध लें। यह बहुत शुभप्रद, भाग्योन्नायक तथा लक्ष्मीप्रद तावीज है। इससे हरेक प्रकार के भय का नाश होता है। शुत्र से रक्षा होती है। कोर्ट-कचहरी में आदि तावीज को बांध कर जाएं, तो सफलता आवश्य ही मिलेगी। इसके धारण किए रहने से प्रत्येक कार्य में उन्नति होती है, भाग्य साथ देता है और धन की वृद्धि होती है।

वास्तु टिप्स: ऐसी होनी चाहिए घर की बाउण्ड्री वॉल


घर चाहे छोटा हो या बड़ा, गांव में हो या शहर में, बाउण्ड्री वॉल यानी चारदीवारी अवश्य बनाई जाती है। घर की बाउण्ड्री वॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-

1- बाउण्ड्री की नींव तो गहरी ही खुदवाएं। नीचे से डेढ़ या दो फुट मोटी पत्थर की दीवार बनवाएं किंतु प्लींथ से ऊपर दीवार की चौड़ाई कम से कम रखें।

2- भवन निर्माण से पूर्व ही बाउण्ड्री वॉल की नींव भर देनी चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव को भूखण्ड में आने से रोका जा सके।

3- आगे की बाउण्ड्री वॉल पर लोहे की, सीमेंट की अथवा पत्थर की रैलिंग लगवाई जा सकती है। बाउण्ड्री वॉल व रेलिंग का शिल्प, भवन के शिल्प से मेल खाता हुआ होना चाहिए।

4- सामने की बाउण्ड्री वॉल की ऊंचाई अधिक नहीं रखनी चाहिए ताकि हवा व प्रकाश अवरुद्ध न हो सके।

5- चारदीवारी घर की सुरक्षा के साथ-साथ घर में अतिरिक्त ऊर्जा के प्रवाह को रोकने में भी मदद करती है।

6- चारदीवारी टूटी-फूटी न हो, टूट-फूट या प्लास्टर उखड़ने पर तुरंत मरम्मत करवा दें।


घर में कुआं बनवाते समय रखें इन बातों का ध्यान

जल के बिना जीवन निराधार है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमारे शरीर में तथा भूमि में भी जल की मात्रा अन्य तत्वों से अधिक है। कूप अथवा नलकूप खुदवाकर अपनी आवश्यकता के अनुरूप जल प्राप्त किया जा सकता है। कूप (कुआं)  या नलकूप (हैंडपंप) खुदवाने से पहले वास्तु शास्त्रियों का मत अवश्य लेना चाहिए। कूप खनन के लिए शुभ तिथि, वार व नक्षत्र निम्न हैं-

शुभ वार- कूप खनन के लिए, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, व शुक्रवार शुभ दिवस हैं ।

शुभ तिथि- शुक्लपक्ष की 2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, 13 व पूर्णिमा तिथि शुभ मानी गई है।

शुभ नक्षत्र- हस्त, अनुराधा, रेवती, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, धनिष्ठा, शतभिषा, मघा, रोहिणी, पुष्प, मृगशिरा व पूर्वाषाढ़ा।

उक्त सभी शुभ तिथि, वार व नक्षत्र में नलकूप व कूप खुदवाना चाहिए। शुभ होरा या चौघड़िया मुहुर्त का भी ध्यान रखना चाहिए। क्षय मास, अधिक मास, भद्रा या कुयोग नहीं हो।

ऐसे करें शिव को प्रसन्न, होगी हर मनोकामना पूरी

भगवान शिव की पूजा करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसा पुराणों में वर्णित है। शिवमहापुराण में विभिन्न रसों से भगवान शिव की पूजा का वर्णन विस्तारपूर्वक बताया गया है, जिससे साधक को कई रोगों से छुटकार मिल जाता है वहीं मनचाहे फल की प्राप्ति भी होती है। इनका वर्णन इस प्रकार है-

- ज्वर(बुखार) से पीड़ित होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से फ़ौरन लाभ मिलता है। 

- सुख व संतान की प्राप्ति  के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है। 

- उत्तम भस्म धारण कर दिव्य द्रव्यों से शिव का अभिषेक करने तथा सहस्त्रनाम मंत्रों से घी की धारा चढ़ाने से वंश की वृद्धि होती है। 

- यदि दस हजार मंत्रों से शिव की पूजा की जाए तो प्रमेह(डायबिटीज) रोग समाप्त हो जाता है। 

- नपुंसक व्यक्ति अगर घी से शिव का अभिषेक करे व ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा प्राजापत्य व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान हो जाता है। 

- भगवान शिव पर ईख(गन्ना) के रस की धारा चढ़ाई जाए तो  सभी आनन्दों की प्राप्ति होती है। 

- शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। 

- मधु (शहद) की धारा शिव पर चढ़ाने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग दूर हो जाता है।

यह सभी रसों की धाराएं मृत्युंजय मंत्र से चढ़ानी चाहिए, उसमें भी उक्त मंत्र का दस हजार जप करना चाहिए तथा ग्यारह ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। तभी मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

Saturday, May 26, 2012

क्‍या आपके घर की सीढ़ियां वास्‍तु के अनुरूप हैं?

वास्‍तु की दृष्टि से भूखण्ड में सीढ़ियों को किस दिशा में एंव उनकी संख्या क्या होनी चाहिए? यह महत्वपूर्ण विषय है। सीढ़ियों का क्रम नीचे से उपर की ओर होता है, इसलिए मकान में सीढ़ियां ऊर्जा की गति का सूचक होती हैं।

वास्तु के अनुसार सीढ़ियों का निर्माण इस प्रकार किया जाना चाहिए-


  • सीढ़ियों का द्वार पूर्व या दक्षिण दिशा में होना लाभप्रद होता है।
  • सीढ़ियां मकान में दक्षिण या पश्चिम दिशा के दायीं ओर रखना चाहिए।
  • यदि सीढ़ियां घुमावदार बनानी हैं तो, उनका सदैव पूर्व से दक्षिण, दक्षिण से पश्चिम, पश्चिम से उत्तर और उत्तर से पूर्व की ओर रखना लाभप्रद रहता है। इसका मतलब है कि चढ़ते समय सीढ़ियां हमेशा दायीं ओर मुड़नी चाहिए।
  • सीढ़ियों की संख्या हमेशा विषम होना चाहिए। सीढ़ियों की संख्या इस प्रकार होनी चाहिए कि उसे 3 से भाग दें तो 2 शेष रहे। जैसे- 5, 11, 17, 23, 29, 32, 36 आदि।
  • सीढ़ियों की नीचे और उपर द्वार रखना चाहिए। नीचे वाले दरवाजे से उपर वाला दरवाजा 12 भाग कम होना चाहिए।
  • यदि किसी मकान में सीढ़ियां पूर्व या उत्तर दिशा में बनी हों तो, उसके वास्तुदोष को कम करने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक कक्ष बनवाना देना चाहिए।
  • सीढ़ियों के नीचे किसी भी प्रकार का कबाड़, जूता-चप्पल आदि रखना परिवार के मुखिया के लिए अशुभकारी होता है।

घर में बालकनी के लिए वास्‍तु टिप्‍स

किसी भी भवन की सौन्दर्यता एंव हवा व प्रकाश अधिक से अधिक मात्रा में मिले, इसके लिए भूखण्डों में बालकनी का होना अपरिहार्य है। भवन में बालकनी एक प्रकार से खुले स्थान का विकल्प मानी जाती है।

बालकनी से हम प्रातः काल स्वच्छ वायु एंव सूर्य की प्राकृतिक उर्जा का आनन्द ले सकते है। यदि भूखण्ड में बालकनी को वास्तु के अनुसार बनाया जाये तो हितकर व लाभप्रद परिणाम मिलते है।

1- यदि आपका भवन पूर्वमुखी है, तो बालकनी पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। ऐसे भवन में बालकनी पश्चिम या दक्षिण दिशा में कदापि न बनायें।

2- पश्चिममुखी भवन में बालकनी को उत्तर या पश्चिम की दिशा में बनाना शुभ माना जाता है।

3- जिन लोगों का मकान उत्तरमुखी है, उसमें बालकनी को पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना हितकर रहता है।

4- यदि आपका भूखण्ड दक्षिणमुखी है तो, बालकनी को पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना लाभप्रद साबित होता है।

5- बालकनी का चयन हमेशा भवन के मुख के आधार पर ही करना उचित रहता है। परन्तु या ध्यान रखना चाहिए कि प्रातःकालीन की सकारात्मक उर्जा एंव प्रकाश का प्रवेश घर में निर्बाध रूप से होता रहें। 

वास्‍तु की इन टिप्‍स का पालन कर आप अपने घर में खुशियां ही खुशियां ला सकते हैं। इससे न केवल आपके घर में शांति बनी रहेगी बल्कि धनलक्ष्‍मी का भी वास होगा। ये टिप्‍स सिर्फ मकान ही नहीं बकि फ्लैट पर भी लागू होती हैं।

घर में सुख-शांति बनाये रखने के लिए कुछ सुझाव

क्‍या आपके घर में आये दिन कलह होती है? क्‍या घर में झगड़ों की वजह से आपका मन दिन भर तनाव से भरा रहता है या फिर घर में झगड़ों के कारण आपके कई काम रुक जाते हैं? यदि ऐसा है तो हो सकता है आपके घर का वास्‍तु ठीक नहीं हो। यहां पर लखनऊ के ज्‍योतिषाचार्य पंडित अनुज के शुक्‍ला बता रहे हैं कुछ उपाये-

1- घर में छत के उपर पानी की टंकी की स्थापना दक्षिण-पश्चिम के कोने में करना चाहिए।

2- घर में उत्तर-पूर्व में या उत्तर दिशा की ओर नदीं या तालाब हो तो, शुभ परिणाम मिलते है। परन्तु पश्चिम दिशा की ओर नदीं या नाला बहता हो तो, शुभ नहीं माना जाता है।

3- भवन में उत्तर-दक्षिण दिशा के कक्ष में धातु के सिक्कों से भरा हुआ स्फटिक का कटोरा रखें। यह दिशा गृह स्वामी के नेतृत्व की दिशा मानी जाती है।

4- रसोई घर में अग्नि और पानी के बीच दूरी होनी चाहिए। अग्नि तत्व व पानी तत्व दोनों आपस में विरोधी होते है। अतः इनका पास-पास होना अशुभ माना जाता है।

5- घर में साफ-सफाई लगाते समय पानी में थोड़ा सा नमक मिला लेना चाहिए जिससे घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह बना रहता है।

6- परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ खींचा हुआ चित्र किसी उपयुक्त स्थान पर लगाना चाहिए। घ्यान रहें कि सभी सदस्य प्रसन्न मुद्रा में मुस्कराते हुए दिखाई दे।
यह चित्र दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगाया जाये तो, ज्यादा उपयुक्त रहेगा।

7- दरवाजे के सामने पैर करके नहीं सोना चाहिए। यह वास्तु के अनुसार अशुभ माना जाता है।

उपरोक्त सावधानी बरतने से परिवार में सुख व समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

उपाय


शनि की पनोती हो तो :-

किसी को शनि का दोष है | कोई बोले के आप को शनि की पनोती है इसलिएआप के घर में दुःख है या पैसो की तंगी है तो आप गन्ने का रस शिवलिंग पेजप करते हुए चढ़ाये, फिर जल चढ़ाये, फिर छाझ (खट्टी न हो ऐसी छाझ) से अभिषेक करे |बेल पत्ते चढ़ाये | गुरु मंत्र जप करे ..लाभ ही लाभ !!

वैशाखी पूनम :-

वैशाख मास की पूर्णिमा की कितनी महिमा है !! एस पूर्णिमा को जो गंगा में स्नान करता है , भगवत गीता और विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करता है उसको जो पुण्य होता है उसका वर्णन इस भूलोक और स्वर्गलोक में कोई नहि कर सकता उतना पुण्य होता है | ये बात स्कन्द पुराण में लिखी हुए है | अगर कोई विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ न कर सके तो गुरु मंत्र की १० माला जादा कर ले आपने नियम से |

लक्ष्मी स्थायी रखने के लिए

सप्ताह में एक दिन जो नमक नहीं खाता, उसके घर में लक्ष्मी स्थायी निवास करती है | रविवार या मंगलवार दो में से एक दिन जो नमक छोद दे उसके घर लक्ष्मी आये बिना नहीं रहेगी |

अपना ही कोई परेशान करता हो तो :-

घर पे अपना ही कोई व्यक्ति घर का अपने को परेशान करता है जैसे बेटा/बेटी जिद बहुत करे ..कहना न माने , पति गुस्सा बहुत करता है या पत्नी गुस्सा बहुत करती है या अपने रिस्तेदारो में से कोई परेशान करता हो तो ... रात को सोते समय अपने सिराहने के पास ताम्बे के लोटे में पानी भर दिया और उसमे थोड़ा लाल चन्दन मिला के रख दिया | सुबहनाहा धो कर वो पानी भगवान का स्मरण कर के ..उसको सद्बुद्धि मिले..उसका स्वभाव बढ़िया हो और मेरा भी स्वभाव बढ़ीया हो ... वो पानी तुलसी के गमले में डाल दे | सदभाव करके |

High BP या Low BP की तकलीफ हो तो :-

High BP या Low BP की तकलीफ जादा रहती हो तो
  • वे tension छोड़ दे | जो होगा देखा जायेगा |
  • जीवन रसायन नाम की पुस्तक पढ़े |
  • प्राणायाम ठीक से करे और
  • मंगल गायत्री मंत्र बोलते रहे ...
“ ॐ अंगारकाय विद्महे | शक्तिहस्ताय धीमहि | तन्नो भौम प्रचोदयात |”

दुकान पे मन नहीं लगता हो तो :-

दुकान पे कई लोगो का मन नहीं लगता या मजा नहीं आता ....कई बार कुछ ग्राहिकी नहीं होती तो भी मन नहीं लगता या कई बार इससे ही मन उचाट रहता है …दुकान पर मन नहीं लगता होतो दुकान के मुख्य द्वार पर गणपतिजी की तस्वीर लगायी जाये और थोडासा कपूर जला कर घुमा दें | जहाँ से ग्राहक आते है उधर और दुकान मेंशांत बैठ के थोड़ा गुरु मंत्र का जप करे | तो अपने आप मन भी लगता है और कोई दोष हो तो वो भी नष्ट हो जाते है |

गौझरण विशेष :-

  • · देशी गाय का झरण सुबहे कपडे से ३-४ बार छानकर पी जाये थोडासा ...पेट की सब खराबियाँ दूर होगी | पाचन तंत्र बढ़िया रहेगा |
  • · मोटापा जादा हो जाये तो भी गौझारण पिये..मोटापा कम होने लगेगा | कोई भी दावाई लेने की जरुरत नहीं |
  • · खासी और कफ की शिकायत बहुत बढ़ जाये तो गौझरण पियेतो तकलीफ ठीक हो जायेगी |
गौझरण न मिले तो गौझरण अर्क अपनी गौ शाला में बनता है उसका सेवन करे पानी में मिलाकर ..गर्मियों में कम करना चाहिए ॥गरम होता है |

मंगल की स्तुति का मंत्र

मंगल की स्तुति का मंत्र है ...
धरणी गर्भ संभूतं विद्युत् कांति समप्रभम |
कुमारं शक्ति हस्तं तं मंगलम प्रणमाम्यहम || 
 मंगलाय नम:।  मंगलाय नम: |  मंगलाय नम: |