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Friday, April 24, 2015

अंगूठे से ऐसे तय होता है वर-वधु का भाग्य


ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अंगूठा स्वत: ही आपके निर्णय को सही या गलत साबित कर सकता है। महान हस्तरेखा विज्ञानी कीरो का कहना था कि अंगूठा ही स्वयं ईश्वर का प्रतिनिधि है। न्यूटन ने तो यहां तक कहा था कि ईश्वर से साक्षात्कार के लिए अंगूठा ही काफी है।
चलिए बताते हैं क्या खासियत छिपी है हाथ के इस अंगूठे के भीतर:
निर्णय के दौरान
अगर आप किसी निर्णय पर पहुंचना चाहते हैं, काफी लंबे समय से आपके भीतर किसी विशेष समस्या को लेकर मंथन चल रहा है। अचानक आप किसी निर्णय पर पहुंचे और निर्णय लेते समय आपके हाथ का अंगूठा, अंगुलियों के नीचे हैं तो समझ जाइए यह निर्णय आपके लिए नकारात्मक साबित होगा।

नियंत्रित स्थिति
अगर किसी से लड़ते या क्रोधित होते समय हाथ की अंगुलियां, अंगूठे के ऊपर हो तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है, वहीं अगर अंगूठा ऊपर हो और अंगुलियां नीचे तो स्थिति निश्चित तौर पर नियंत्रण में है।
दक्षिण स्थान
शास्त्रों में भी अंगूठे की जड़ में ब्रह्मतीर्थ कहा गया है, पितरों को तर्पण करने के लिए अंगूठा ही काम आता है। दक्षिण में पितरों का स्थान माना जाता है और दाएं हाथ का अंगूठा भी दक्षिण में ही स्थित है।
तीन पोरें
अंगूठे में सामान्यतौर पर तीन पोरें होती हैं। जिनमें से पहली पोर इच्छा शक्ति, दूसरी तर्क शक्ति और तीसरी जो शुक्र पर्वत से जुड़ती है, गृहस्थ जीवन या प्रेम संबंधों में सुख-शांति को दर्शाती है।
समान पोरें
जिस व्यक्ति का अंगूठा चौड़ा, सीधा और सभी पोरों में समान रूप से बंटा होता है वह व्यक्ति समय के महत्व को समझता है और धन का अपव्यय करने से बचता है। ऐसे व्यक्ति समाज की बातें ज्यादा नहीं मानते, अपनी इच्छा से ही सही-गलत का निर्णय करते हैं।
भविष्य का निर्धारण
ऐसा व्यक्ति किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहता व अपने भविष्य का निर्धारण स्वयं करने के लिए तैयार रहता है।
मजबूत अंगूठा
सुदृढ़ और मजबूत अंगूठे वाला व्यक्ति महत्वाकांक्षी, कर्तव्य का पालन करने वाला और अच्छे स्वभाव वाला होता है। वह दूसरों के साथ जानबूझकर कभी गलत नहीं करता।
लचीला अंगूठा
वहीं जिस व्यक्ति का अंगूठा मजबूत ना होकर थोड़ा लचीला होता है वह वक्त के साथ-साथ खुद को बदलने में विश्वास रखता है। वह मृदुभाषी होने के साथ-साथ ज्यादा अड़ियल नहीं होता।
अपराधी प्रवृत्ति
जिस व्यक्ति के अंगूठे की पहली पोर मोटी और छोटी होती है वे बिना सोचे-समझे जीवन जीने में विश्वास करते हैं। ऐसे व्यक्ति किसी भी समय कुछ भी बोलते हैं और बात-बात पर क्रोधित होते हैं। जिन लोगों के दोनों हाथों के अंगूठों की पहली पोरें छोटी और मोटी होती हैं, उनमें गहरी अपराधी प्रवृत्ति देखी जा सकती है।
कोमल स्वभाव
चौकोर अंगूठा सामान्य बुद्धि-विवेकशीलता का द्योतक है। वहीं नुकीले अंगूठे वाला व्यक्ति शीघ्र काम कर सकने में सक्षम होता है। चपटे अंगूठे वाले लोग स्वभाव से कोमल होने के अलावा किसी से बैर नहीं रखते।
चालाक व्यक्ति
चौड़े अंगूठे वाले लोग अपने मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को पार कर सफलता पाने में सक्षम होते हैं। यदि अंगूठे का बीच वाला भाग पतला होता है तो वह व्यक्ति चतुर और चालाक होता है। वह किसी भी रूप में अपना काम निकाल सकता है।

लो सेट और हाइ सेट
अंगूठे को दो भागों में विभाजित किया जाता है, लो सेट अंगूठा और हाइ सेट अंगूठा। अगर किसी व्यक्ति का अंगूठा गुरु पर्वत से दूर है तो उसे लो सेट अंगूठा कहेंगे। गुरु पर्वत से नजदीक होने वाले अंगूठे को हाइ सेट अंगूठा माना जाएगा।
गुरु पर्वत
अंगूठा जितना ज्यादा ऊंचा और गुरु पर्वत के नजदीक होगा व्यक्ति उतना ही कम बुद्धि वाला होगा। मंद बुद्धि लोग इसी श्रेणी में आते हैं। वहीं दूसरी ओर लो सेट अंगूठे वाले लोग, काफी मिलनसार, विवेकशील, बेहतरीन वक्ता, ज्ञाता और बुद्धिमान प्रवृत्ति के होते हैं।
अहंकार
विवाह के समय यह बात जरूर देखनी चाहिए कि संबंधित महिला-पुरुष, दोनों के ही अंगूठे सीधे ना हों। ऐसा होने पर दोनों में टकराहट रहती है। साथ ही अंगूठे ज्यादा लचीले भी ना हों तो कोई भी निर्णय ले पाने की क्षमता वाला नहीं होगा।
बना रहे सामंजस्य
एक सफल विवाह में जरूरी है कि एक का अंगूठा लचीला और दूसरे का थोड़ा मजबूत हो ताकि सामंजस्य बना रहे।

Thursday, April 16, 2015

कुछ उपयोगी टोटके


कुछ विशेष मंत्रों के जप तथा कुछ चैपाइयों के पाठ से रोगों, क्लेशों तथा अन्य विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यहां ऐसे ही कुछ मंत्रों और रामायण की कुछ चैपाइयों का विवरण प्रस्तुत है, जिनके नियमित जप तथा पाठ से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है।
नजर कामण शांति करण मोर के पंख से 11 बार झाड़ा लगा दें। (ग्रहण के समय निम्नोक्त मंत्र जप कर सिद्ध कर लें।) मंत्र - ओम
  नमो सत्नाम आदेश गुरु को ओम नमो नजर जहां पर पीर न जानी बोले छल सों अमृत बानी कहो नजर कहां ते आई यहां की ढेरि तोहि कौंन बताई। कौन जात तेरी को ढाम, किसी बेटी कहो तेरो नाम। कहां से उड़ी कहां को जादा। अब ही बस करले तेरी माया। मेरी बात सुनो चिŸा लगाय जैसे होय सुनाऊं आय। तेलन तमोलन चुहड़ी चमारी कायथनी खतरानी कुम्हारी महतरानी राजा रानी। जाको दोष ताहि सिर पर पड़े। हनुमंतवीर नजर से रक्षा करे। मेरी भक्ति गुरु की शक्तिफुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।

 विघ्न बाधाओं से मुक्ति हेतु रामायण की कुछ विशेष चैपाइयों का पाठ करना चाहिए, जो इस प्रकार हैं।
 नजर दोष से मुक्ति के लिए: श्याम गौर सुंदर दोऊ जोरी। निरखहिं छवि वृत तोरी।।
भूत भगाने के लिए: प्रनवऊं पवन कुमार खल वन पावक ज्ञान धन जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।
 कठिन क्लेश से मुक्ति के लिए: हरन कठिन कलि कलु कलेसू। महा मोह निसि दलन दिनेसू।।
 दरिद्रता दूर करने के लिए: अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारिके ।।
शीघ्र विवाह के लिए: तब जनक परइ वशिष्ठ आयुस ब्याह साज संवारि के। मांडवी श्रुत कीरत उरमिला कुंअरि लई हंकारिके।।
 साधना में रक्षा मंत्र चारों ओर खींचना जिसे लक्ष्मण रेखा कहा जाता है। ‘‘माममिरक्षय रघुकुल नायक। घृत वर चाप रुचिर कर सायक।। मानसिक पीड़ा दूर करने करे लिए ः हनुमान अंगद रन गाजे। हांक सुनत रजनीचर भागे।।
 अकाल मृत्यु बचाव के लिए: नाम पहारु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं वाट।।
कन्या के विवाह हेतु: जै जै जै गिरिराज किशोरी जय महेश मुख चंद्र चकोरी।
विचार शुद्धि के लिए: ताके जुग पद कमल मनावऊं। जासु कृपा निरमल मति पावऊं।।
विविध रोगों से रक्षा के लिए: दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज्य नहिं काहहिं ब्यापा।।

हस्त रेखाओं व ज्योतिष से जानें पेट रोग के कारण व निवारण


ईश्वर ने हमारी हस्त रेखाओं में हमारे ईश्वर ने हमारी हस्त रेखाओं में हमारे भाग्य, हमारी शिक्षा, हमारी आयु और स्वास्थ्य को स्पष्ट रूप से चित्रित कर रखा है। हमारी कुंडली में भी इन सारे पहलुओं का स्पष्ट चित्र दिखाई देता है। इन रेखाओं की बनावट, मोटाई, हाथ और उंगलियों के आकार, ग्रहों के उभार, दबाव आदि को देखकर शारीरिक दुखों, बीमारियों और स्वास्थ्य की परिस्थितियों को जाना सकता है। कुंडली में लग्न पर विभिन्न ग्रहों की दृष्टि, जीवन काल में ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा आदि के आधार पर किसी भी व्यक्ति के जीवन में कौनसी बीमारी किस समय होगी और कितनी कष्टप्रद होगी इसका सरलता से अनुमान लगाया जा सकता है। हमारे शरीर में हर बीमारी की शुरुआत हमारे खान-पान में असंयम और अनियमितता तथा पेट की गड़बड़ी के कारण होती है। प्राचीन चिकित्सा शास्त्र के ग्रंथों में भी कहा गया है कि प्रत्येक बीमारी की जड़ पेट ही होता है। पेट के रोगों की शुरुआत कब्ज से होती है। इस कब्ज का यदि समय रहते उपचार न हो, तो व्यक्ति अल्सर, गैस डाइबिटीज या बवासीर से ग्रस्त हो सकता है। महिलाओं में गर्भ संबंधी बीमारियां भी पेट की गड़बड़ी के कारण पैदा होती हैं। पेट का कैंसर आनुवंशिक या अत्यधिक शराब, सिगरेट अथवा अन्य नशीली वस्तुओं के सेवन से हो सकता है। हस्त रेखा व ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन से हम पेट की बीमारियों का पूर्वानुमान लगाकर समय रहते उनसे अपना बचाव कर सकते हैं। यहां पेट के विभिन्न रोगों को दर्शाने वाली रेखाओं का विश्लेषण प्रस्तुत है जिसे पढ़कर हस्तरेखा का साधारण ज्ञान रखने वाले लोग भी लाभ उठा सकते हैं। जीवन रेखा के नीचे द्वीप हो, भाग्य रेखा दोषपूर्ण हो और मस्तिष्क रेखा खंडित हो तो व्यक्ति गैस, एसीडिटी आदि से ग्रस्त हो सकता है। मंगल क्षेत्र दोषपूर्ण हो, जीवन रेखा खंडित या बीच में कटी हो, मस्तिष्क रेखा मंे शनि के नीचे दोष के लक्षण हों तो व्यक्ति के पेट की किसी भयंकर गड़बड़ी से ग्रस्त होने की संभावना रहती है जिससे मुक्ति के लिए आपरेशन करना पड़ सकता है। जीवन रेखा के समानांतर कोई अन्य रेखा चल रही हो, शनि और सूर्य पर्वत अस्त हांे, भाग्य रेखा जीवन रेखा के साथ हो और मंगल क्षेत्र में बहुत सी रेखाएं आपस में काट रही हों तो अपेंडिक्स आदि उदर रोग होने की संभावना रहती है। जीवन रेखा को यदि मोटी-मोटी राहु रेखाएं काटते हुए मस्तिष्क रेखा पर जा रही हों तो यह पेट की खराबी के कारण सिर में भारीपन का लक्षण है। यदि भाग्य रेखा के साथ कोई अन्य पतली भाग्य रेखा हो, जीवन रेखा के साथ कोई अन्य रेखा मंगल क्षेत्र पर जा रही हो तो व्यक्ति को मोटापे की समस्या हो सकती है। कुंडली के आधार पर मंगल और चंद्र की स्थितियों के आधार पर पेट के रोगों का आकलन करते हैं। यहां पेट के रोगों के लक्षणों को दर्शाने वाली उक्त ग्रहों स्थितियों का विश्लेषण प्रस्तुत है। कुंडली में छठा घर बीमारी का घर माना जाता है। यदि नीच का चंद्र या मंगल छठे घर में हो या उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति के गैस, अपेंडिक्स आदि से ग्रस्त होने की संभावना रहती है। उसे भूख अधिक या कम लग सकती है। इसके अतिरिक्त उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है। यदि लग्न में चंद्र या मंगल अथवा दोनों नीच के हों और उन पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो, व्यक्ति को गैस, हर्नियां पेट में दर्द और कीड़े की संभावना रहती है। लग्न कुंडली में आठवां भाव मौत का या आयु का भाव माना जाता है। इस भाव में यदि मंगल या चंद्र नीच का हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो, तो व्यक्ति को पेट के रोगों से मृत्यु तुल्य कष्ट हो सकता है और उससे मुक्ति के लिए आपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। यदि नीच का गुरु लग्न में भाव 6 या 8 में हो तो व्यक्ति के मोटापा से ग्रस्त होने की संभावना रहती है जो पेट के लिए भयावह रूप ले सकता है। इन परिस्थितियों से बचने के लिए हनुमान चालीसा का नित्य सुबह शाम पाठ और मंगलवार को व्रत करना चाहिए। यदि दोष चंद्र का हो तो सोमवार का व्रत रखना चाहिए। गुरु ग्रह के कष्टदायी होने पर गुरुवार को उपवास रखना चाहिए। हल्के पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और प्रतिदिन सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए। किसी ज्योतिषीे या हस्तरेखा विशेषज्ञ से सलाह लेकर विधिपूर्वक मूंगा रत्न धारण करने से भी पेट के रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक चिकित्सा के कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार हैं। रात को दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर पीना चाहिए। एक चुटकी छोटी हर्र गर्म पानी में मिलाकर पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है। जीरा तथा सेंधा नमक पीसकर गर्म पानी के साथ खाने से भूख में कमी, पेट फूलने, दस्त, कब्ज और खट्टी डकारों से मुक्ति मिलती है। एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच शहद और एक नींबू का रस डालकर पीने से अधिक चर्बी व मोटापे से छुटकारा पाया जा सकता है। एक गिलास पानी में पांच ग्राम फिटकरी घोलकर पीने से हैजे में लाभ होता है। रात को सोने के पहले दूध में मुनक्का उबालकर पीने से कब्ज से छुटकारा मिलता है। यदि समय रहते किसी योग्य हस्त रेखा विशेषज्ञ अथवा ज्योतिषी से सलाह लेकर उक्त उपाय किए जाएं, तो पेट के रोगों से रक्षा हो सकती है।