Saturday, April 30, 2011

मानस के सिद्ध स्तोत्रों के अनुभूत प्रयोग


१॰ ऐश्वर्य प्राप्ति

‘माता सीता की स्तुति’ का नित्य श्रद्धा-विश्वासपूर्वक पाठ करें।

“उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।

सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्।।” (बालकाण्ड, श्लो॰ ५)”

अर्थः- उत्पत्ति, स्थिति और संहार करने वाली, क्लेशों की हरने वाली तथा सम्पूर्ण कल्याणों की करने वाली श्रीरामचन्द्र की प्रियतमा श्रीसीता को मैं नमस्कार करता हूँ।।

२॰ दुःख-नाश

‘भगवान् राम की स्तुति’ का नित्य पाठ करें।

“यन्मायावशवर्तिं विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा

यत्सत्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।

यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां

वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्।।” (बालकाण्ड, श्लो॰ ६)

अर्थः- सारा विश्व जिनकी माया के वश में है और ब्रह्मादि देवता एवं असुर भी जिनकी माया के वश-वर्ती हैं। यह सब सत्य जगत् जिनकी सत्ता से ही भासमान है, जैसे कि रस्सी में सर्प की प्रतीति होती है। भव-सागर के तरने की इच्छा करनेवालों के लिये जिनके चरण निश्चय ही एक-मात्र प्लव-रुप हैं, जो सम्पूर्ण कारणों से परे हैं, उन समर्थ, दुःख हरने वाले, श्रीराम है नाम जिनका, मैं उनकी वन्दना करता हूँ।



३॰ सर्व-रक्षा

‘भगवान् शिव की स्तुति’ का नित्य पाठ करें।

“यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके

भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट,

सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा शर्वः

सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशङ्करः पातु माम

” (अयोध्याकाण्ड, श्लो॰१)

अर्थः- जिनकी गोद में हिमाचल-सुता पार्वतीजी, मस्तक पर गंगाजी, ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा, कण्ठ में हलाहल विष और वक्षःस्थल पर सर्पराज शेषजी सुशोभित हैं, वे भस्म से विभूषित, देवताओं में श्रेष्ठ, सर्वेश्वर, संहार-कर्त्ता, सर्व-व्यापक, कल्याण-रुप, चन्द्रमा के समान शुभ्र-वर्ण श्रीशंकरजी सदा मेरी रक्षा करें।



४॰ सुखमय पारिवारिक जीवन

‘श्रीसीता जी के सहित भगवान् राम की स्तुति’ का नित्य पाठ करें।

“नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम,

पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम

” (अयोध्याकाण्ड, श्लो॰ ३)

अर्थः- नीले कमल के समान श्याम और कोमल जिनके अंग हैं, श्रीसीताजी जिनके वाम-भाग में विराजमान हैं और जिनके हाथों में (क्रमशः) अमोघ बाण और सुन्दर धनुष है, उन रघुवंश के स्वामी श्रीरामचन्द्रजी को मैं नमस्कार करता हूँ।।



५॰ सर्वोच्च पद प्राप्ति

श्री अत्रि मुनि द्वारा ‘श्रीराम-स्तुति’ का नित्य पाठ करें।

छंदः-

“नमामि भक्त वत्सलं । कृपालु शील कोमलं ॥

भजामि ते पदांबुजं । अकामिनां स्वधामदं ॥

निकाम श्याम सुंदरं । भवाम्बुनाथ मंदरं ॥

प्रफुल्ल कंज लोचनं । मदादि दोष मोचनं ॥

प्रलंब बाहु विक्रमं । प्रभोऽप्रमेय वैभवं ॥

निषंग चाप सायकं । धरं त्रिलोक नायकं ॥

दिनेश वंश मंडनं । महेश चाप खंडनं ॥

मुनींद्र संत रंजनं । सुरारि वृंद भंजनं ॥

मनोज वैरि वंदितं । अजादि देव सेवितं ॥

विशुद्ध बोध विग्रहं । समस्त दूषणापहं ॥

नमामि इंदिरा पतिं । सुखाकरं सतां गतिं ॥

भजे सशक्ति सानुजं । शची पतिं प्रियानुजं ॥

त्वदंघ्रि मूल ये नराः । भजंति हीन मत्सरा ॥

पतंति नो भवार्णवे । वितर्क वीचि संकुले ॥

विविक्त वासिनः सदा । भजंति मुक्तये मुदा ॥

निरस्य इंद्रियादिकं । प्रयांति ते गतिं स्वकं ॥

तमेकमभ्दुतं प्रभुं । निरीहमीश्वरं विभुं ॥

जगद्गुरुं च शाश्वतं । तुरीयमेव केवलं ॥

भजामि भाव वल्लभं । कुयोगिनां सुदुर्लभं ॥

स्वभक्त कल्प पादपं । समं सुसेव्यमन्वहं ॥

अनूप रूप भूपतिं । नतोऽहमुर्विजा पतिं ॥

प्रसीद मे नमामि ते । पदाब्ज भक्ति देहि मे ॥

पठंति ये स्तवं इदं । नरादरेण ते पदं ॥

व्रजंति नात्र संशयं । त्वदीय भक्ति संयुता ॥” (अरण्यकाण्ड)

‘मानस-पीयूष’ के अनुसार यह ‘रामचरितमानस’ की नवीं स्तुति है और नक्षत्रों में नवाँ नक्षत्र अश्लेषा है। अतः जीवन में जिनको सर्वोच्च आसन पर जाने की कामना हो, वे इस स्तोत्र को भगवान् श्रीराम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर नित्य पढ़ा करें। वे अवश्य ही अपनी महत्त्वाकांक्षा पूरी कर लेंगे।



६॰ प्रतियोगिता में सफलता-प्राप्ति

श्री सुतीक्ष्ण मुनि द्वारा श्रीराम-स्तुति का नित्य पाठ करें।

“श्याम तामरस दाम शरीरं । जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं ॥

पाणि चाप शर कटि तूणीरं । नौमि निरंतर श्रीरघुवीरं ॥१॥

मोह विपिन घन दहन कृशानुः । संत सरोरुह कानन भानुः ॥

निशिचर करि वरूथ मृगराजः । त्रातु सदा नो भव खग बाजः ॥२॥

अरुण नयन राजीव सुवेशं । सीता नयन चकोर निशेशं ॥

हर ह्रदि मानस बाल मरालं । नौमि राम उर बाहु विशालं ॥३॥

संशय सर्प ग्रसन उरगादः । शमन सुकर्कश तर्क विषादः ॥

भव भंजन रंजन सुर यूथः । त्रातु सदा नो कृपा वरूथः ॥४॥

निर्गुण सगुण विषम सम रूपं । ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं ॥

अमलमखिलमनवद्यमपारं । नौमि राम भंजन महि भारं ॥५॥

भक्त कल्पपादप आरामः । तर्जन क्रोध लोभ मद कामः ॥

अति नागर भव सागर सेतुः । त्रातु सदा दिनकर कुल केतुः ॥६॥

अतुलित भुज प्रताप बल धामः । कलि मल विपुल विभंजन नामः ॥

धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामः । संतत शं तनोतु मम रामः ॥७॥” (अरण्यकाण्ड)

विशेषः

“संशय-सर्प-ग्रसन-उरगादः, शमन-सुकर्कश-तर्क-विषादः।

भव-भञ्जन रञ्जन-सुर-यूथः, त्रातु सदा मे कृपा-वरुथः।।”

उपर्युक्त श्लोक अमोघ फल-दाता है। किसी भी प्रतियोगिता के साक्षात्कार में सफलता सुनिश्चित है।



७॰ सर्व अभिलाषा-पूर्ति

‘श्रीहनुमान जी कि स्तुति’ का नित्य पाठ करें।

“अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं

दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।” (सुन्दरकाण्ड, श्लो॰३)



८॰ सर्व-संकट-निवारण

‘रुद्राष्टक’ का नित्य पाठ करें।

॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।

त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।

चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६॥

न यावत् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।

जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥

॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं संपूर्णम् ॥



विशेषः- उक्त ‘रुद्राष्टक’ को स्नानोपरान्त भीगे कपड़े सहित शिवजी के सामने सस्वर पाठ करने से किसी भी प्रकार का शाप या संकट कट जाता है। यदि भीगे कपड़े सहित पाठ की सुविधा न हो, तो घर पर या शिव-मन्दिर में भी तीन बार, पाचँ बार, आठ बार पाठ करके मनोवाञ्छित फल पाया जा सकता है। यह सिद्ध प्रयोग है। विशेषकर ‘नाग-पञ्चमी’ पर रुद्राष्टक का पाठ विशेष फलदायी है।

बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग


बजरंग बाण

भौतिक मनोकामनाओं की पुर्ति के लिये बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग

अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें। हनुमानजी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें। ऊनी अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। अनुष्ठान के लिये शुद्ध स्थान तथा शान्त वातावरण आवश्यक है। घर में यदि यह सुलभ न हो तो कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें।

हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें।

जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे। अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम–” से लेकर “–सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है।

गूगुल की सुगन्धि देकर जिस घर में बगरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं पाते। समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए।



बजरंग बाण ध्यान

श्रीराम

अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।

दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।

रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।



जन सामान्य की पीड़ा निवारण में रामचरित मानस और हनुमान चालीसा की चौपाइयां और दोहे जातक की कुंडली में व्याप्त ग्रह दोष और पीड़ा निवारण में सहायक हो सकते हैं। इन्हें सुगमता से समझा जा सकता है और श्रद्धापूर्वक पारायण करने से लाभ मिल जाता है। मानस की चौपाइयों में मंत्र तुल्य शक्तियां विद्यमान हैं। इनका पठन,मनन और जप करके लाभ लिया जा सकता है।


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प्रेम प्राप्ति

भुवन चारिदस भरा उछाहु। जनक सुता रघुबीर बिआहू।।

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।

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रोजगार के लिए

बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

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क्लेश निवारण

हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।

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विध्न्न -बाधा निवारण

प्रणवों पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु ह्वदय आगार बसहि राम सर चाप धर॥ ।



मनोरथ पूर्ति के लिए

भव भेषज रघुनाथ जसु, सुनाही जे नर अरू नारी। तिन्ह कर सकल मनोरथसिद्ध करहि त्रिसिरारी॥ .



एकल चंद्र (केमेन्द्रुम दोष) निवारण

बिन सतसंग बिबेक न होई।राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ॥.



कालसर्प दोष निवारण

रावण जुद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयो यह संकट भारो।।

आनि खगेश तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।

को नहि जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।

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स्थान/ नगर में प्रवेश करते समय

प्रबिस नगर कीजे सब काजा।ह्वदय राखि कोसलपुर राजा।।

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राहु प्रभाव से कलंक मुक्ति के लिए

मंत्र महामनि विषय ब्याल के ।

मेटत कठिन कुअंक भाल के ॥हरन मोह तम दिनकर कर से ।सालि पाल जलधर के॥ .



निराशा यानी शनि प्रभाव से मुक्ति

गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर॥

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आलस्य से मुक्ति

हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रणाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम॥

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विजय प्राप्ति के लिए

विजय रथ का पाठ लंकाकाण्ड ( दोहा 79-80 मध्य) का नियमित पाठ विजय प्राप्त कराता है।

परिकल्पना-प्रोजेक्ट पूर्णता के लिये भागीरथ के गंगा अवतरण प्रयास का नियमित पाठ व्यक्ति की कल्पना को साकार करता है।

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बंधन मुक्ति

सौ बार हनुमान चालीसा पाठ सभी बंधनों से मुक्त करता है।

श्रद्धापूर्वक मनन,पठन, जप और श्रवण करने से सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है। पे्रम और दृढ़ विश्वास फल प्राप्ति के लिए जरूरी है। गुरू मार्गदर्शन लेकर सभी मनोरथ पूरे कर सकते हैं।

गोस्वामी तुलसीदासजी के द्वारा प्रकट किये गये रामचरितमानस के मन्त्र




केवल दो ही चौपाइयों का सम्पुट अधिक मिलता है,एक तो "मंगल भुवन अमंगल हारी,द्रवउ से दसरथ अजिर बिहारी",और दूसरी "दीन दयाल बिरदु सम्भारी,हरहु नाथ मम संकट भारी",इसके बाद जो अधिक जानते है,वे अधिक और चौपाइयों का बखान करते है.पहली चौपाई का भाव केवल एक मनुष्य या परिवार के लिये नही है,इस चौपाई का भाव अगर समझा जावे तो बहुत बडा मिलता है,मंगल का अर्थ अगर ज्योतिष से लिया जावे तो भाई से मिलता है,शरीर में खून से मिलता है,संसार में धर्म से मिलता है,और हिम्मत और साहस से मिलता है,संसार में चलने वाले धर्म के अन्दर अधर्म को चलने से रोकने के लिये प्रार्थना का रूप यह चौपाई है,और प्रभु राम से प्रार्थना की गयी है,कि धर्म के प्रति अब तो इस अधर्मी संसार के मन में द्रवता का भाव भरो,द्रवता का अर्थ दायलुता से है,जो लोग एक दूसरे को मारे डाल रहे है,शराब मांस का भक्षण करने के बाद उनको पता नही होता कि वे क्या करने जा रहे है,जिस जर जोरू जमीन के लिये वे लडे जा रहे है,वह कल भी उनकी नही थी,आज कुछ समय के लिये वे मान सकते है,कि उनकी है,लेकिन कल और किसी की होगी,करोडों वर्षों से यह कहानी चली आ रही है,राजाओं ने फ़ौजें कटवादीं,लाखों लोग इन तीन के लिये मरे और मारे गये है,लेकिन समझ आज भी किसी को नही आ रही है.रामायण की चौपाइयों का अर्थ और उनका महत्व हम आगे कभी समझायेंगे,लेकिन जिन चौपाइयों को केवल स्मरण करने से बाधा दूर होती है,और प्रधानत: शांति का भान होता है,उन चौपाइयों का अर्थ और स्मरण का तरीका हम आपके समक्ष प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे है,किसी प्रकार की भाषाई त्रुटि अगर हो जाती है,तो सज्जन क्षमा भी करेंगे,ऐसा मेरा विश्वास है.

रामायण का सबसे बडा मंत्र

रामायण का सबसे बडा मंत्र मिल जाये तो संसार की कोई भी निधि उसके सामने मायना नही रखती है,निधि को तो चोर ले जायेंगे,लुटेरे लूट लेंगे,लेकिन अगर यह निधि अगर ह्रदय में निवास करते है,तो फ़िर से वापस सभी निधियां आ जायेंगी.रामायण के सबसे बडे मंत्र का बखान श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने कितनी खूबशूरती से किया है:-

"राम रमेति रमेति रमो,रामेति मनोरमे,सहस्त्र नाम तातुल्यम राम नाम वरानने"

इस मंत्र को ह्रदय में रखने के बाद संसार की सभी अमूल्य निधियां मनुष्य की दासी बन जायेंगी,और उसे किसी प्रकार का डर,भय,गरीबी,अपमान,आदि किसी भी बात को सहन नही करना पडेगा.इस मंत्र को मैने अपनाया है,और आज भी मेरे ह्रदय में निवास करता है,इस मंत्र को मैने साक्षात प्रभावी माना है,इसका एक प्रमाण आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ.

Friday, April 29, 2011

यंत्र बनाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

यंत्र साधना बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करती है लेकिन इसका फल तभी मिलता है जब यंत्र बिल्कुल सटीक उपाय से बना हो। यंत्र शास्त्र के अतंर्गत बताया गया है कि यंत्र निर्माण के किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए-

कलम की लंबाई- यंत्र लेखन में प्रयुक्त कलम आठ अंगुल लंबी होनी चाहिए।

कलम की प्रकृति- शांति कर्म में पीपल से बनी कलम, वशीकरण के लिए चमेली से बनी कलम, सम्मोहन के लिए स्वर्ण निर्मित, स्तंभन कार्य के लिए हल्दी की या तांबे से निर्मित कलम का विधान है।

कागज- यदि साधक ब्राह्मण हो तो भोजपत्र पर, यदि क्षत्रिय हो तो ताड़पत्र पर, वैश्य हो तो भूमि पर तथा शुद्र हो को कागज पर यंत्र बनाने का विधान है।

गंध या स्याही- वशीकरण के उद्देश्य से निर्मित यंत्र में कुंकुम की स्याही, आकर्षण एवं स्वर्णाकर्षण के लिए कस्तूरी, स्तंभव में हल्दी, देवी-देवताओं की प्रसन्नता के लिए चंदन से निर्मित स्याही प्रयुक्त करना चाहिए।

यंत्र साधना का समय- सुख-शांति और समृद्धि को लक्ष्य बनाकर निर्मित यंत्र ब्रह्ममुहूर्त में तथा देवोपासना एवं इष्ट साक्षात्कार के लएि ब्रह्ममुहूर्त, अभिचार विद्वेषण एवं उच्चाटन के लिए मध्य का समय उपयुक्त रहता है।

तिथि, वार एवं नक्षत्र- यंत्र साधना प्रारंभ करने से पहले लक्ष्य के लिए अनुकूल यानि कि शुभ तिथि, वार, नक्षत्र एवं चंद्रमा का सावधानीपूर्वक ध्यान रखना चाहिए।

इस दिन कोई नया काम शुरू किया तो?

सामान्यत: किसी भी उत्सव या कार्यक्रम पर हम नई ड्रेस पहनते हैं। ऐसा कोई अवसर यदि शनिवार को आ रहा हो तो उस दिन नई ड्रेस न पहनें। शनिवार ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सबसे अधिक क्रूर और अशुभ समझे जाने वाले ग्रह शनि का दिन है।

शनिवार के दिन कोई नया कार्य न प्रारंभ करने पर भी जोर दिया जाता है। मान्यता है कि इस कार्य प्रारंभ करने पर वह कार्य बड़ी परेशानियों के साथ पूरा होता है तथा उस कार्य में सफलता मिलना बहुत कठिन हो जाता है। इस दिन कहीं बाहर यात्रा पर जाना भी वर्जित किया गया है।

क्रूर ग्रह शनि गरीबों और न्याय का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं राहु और केतु को शनि के अधिन माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ स्थान पर है तो शनि सहित राहु-केतु भी उसके जीवन में कई परेशानियां खड़ी कर देते हैं।

शनि अशुभ होने पर शनिवार को नया कार्य शुरू करने पर शनि का बुरा प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में शनि को अनुकूल करने के लिए निम्न उपाय करें-

- शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालिसा पाठ करें।

- हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।

- पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करें।

- शनिवार को काले या नीले रंग के कपड़े कतई न पहने।

- शनिवार को किसी गरीब को काला कंबल दान करें।

- अपनी जेब में हमेशा एक चांदी का टुकड़ा रखें।

- बहते पानी में नारियल और बादाम प्रवाहित करें।

- सिक्का, जौ, सरसों एवं राहु की वस्तुओं को जल में प्रवाहित करें या दान करें।

- शनिवार को सीधे हाथ की मध्यमा अंगुली (मीडिल फिंगर) में काले घोड़े की नाल का छल्ला पहनें।

धन के देवता कुबेर की कृपा से पाएं धन-वैभव की प्रसाद

हम सभी के लिए समय के साथ धन, पैसा, दौलत की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। इसी वजह से सभी को धन की देवी महालक्ष्मी की कृपा चाहिए। साथ ही देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव भी हमारी धन संबंधी परेशानियां दूर करते हैं। इनकी कृपा के लिए श्रीराम के परम भक्त पवनपुत्र श्री हनुमानजी का ध्यान सबसे अच्छा उपाय है।

हनुमानजी के भक्तों को श्रीराम सहित महालक्ष्मी और कुबेर देव की कृपा भी प्राप्त होती है। आज अधिकांश लोगों के साथ समय अभाव की समस्या बनी हुई है। बजरंगबली के ध्यान के लिए अलग से समय नहीं मिल पाता है तो हर रोज सुबह योग और ध्यान के साथ ही पवनपुत्र का स्मरण किया जा सकता है।

हनुमानजी के ध्यान के लिए किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठ जाएं। अब प्राणायाम की क्रिया पूरक और रेचक प्रारंभ करें अर्थात् सांस लेने की सामान्य क्रिया करें। अब मन को एकाग्र करके हनुमान चालीसा का पाठ करें। यदि हनुमान चालीसा का पूर्ण पाठ नहीं कर पा रहे हों तो इन पंक्तियों का पाठ करें-

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कवि कोबिद कहि सके कहां ते।।

इन पंक्तियों के निरंतर जप से हनुमानजी को प्रसन्न होंगे ही साथ ही यम, कुबेर आदि देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होगी।

मन में उठते बुरे विचार... कैसे लगाएं रोक

मन को निंयत्रित करना और उसमें उठते बुरे और अनुचित खयालात को रोक देना असंभव नहीं तो बेहद कठिन तो अवश्य ही है। आज मनुष्य के जीवन में परेशानियों और कठिनाइयों का अम्बार लगा हुआ है जिससे उसका मन भटकता ही रहता है। जैसे-जैसे समय बदल रहा है ठीक उसी तरह हमारी सोच और काम के तरीके में भी परिवर्तन आ रहा है।

अधिकतर लोग दुर्भावानाओं से घिरे रहते हैं।अगर इनसे छुटकारा पाना है तो हनुमानजी का ध्यान सबसे उत्तम उपाय है। हनुमानजी बुरे विचारों को समाप्त कर हमारे मन को शुद्धता और पवित्रता प्रदान करते हैं। रोज सुबह-सुबह कुछ समय किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठकर प्राणायाम करें और साथ भगवान हनुमानजी का ध्यान करते हुए इस पंक्ति का जप करें

- महाबीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।

इस पंक्ति के जप से साधक के सभी बुरे विचार, कुमति नष्ट हो जाती है और विचारों में शुद्धता आती है। इस पंक्ति का अर्थ यही है कि भगवान हनुमान महावीर हैं और वे अपने भक्तों की कुमति को दूर करके उन्हें शुद्ध विचारों वाला बना देते हैं। हनुमानजी का ध्यान हमें पूरी तरह धार्मिक बनाता है साथ ही हमारे जीवन की सभी समस्याओं का प्रभाव कम कर देता है

यह उपाय करने से होगा प्रमोशन

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहते हैं। वे दिन-रात अपने काम में निखार लाने का प्रयत्न करते रहते हैं और उसमें सफल भी होते हैं लेकिन इसके बाद भी उन्हें प्रमोशन नहीं मिल पाता। जबकि कुछ लोग बिना कुछ किए ही प्रमोशन पा लेते हैं। कुछ ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण ऐसा हो सकता है। यदि आप प्रमोशन चाहते हैं तो नीचे लिखे उपाय कर उन ग्रहों को शांत करें, आपका भी प्रमोशन जल्दी होगा।

उपाय

- यदि शनि आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न कर रहा है, तो एक बर्तन में तिल्ली का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखकर भिखारी को दान कर दें।

- यदि सूर्य के कारण बाधा हो तो प्रतिदिन पहली रोटी गाय को दें यदि गाय काली या पीली हो तो और भी शुभ रहता है।

- चन्द्र के कारण बाधा हो तो पिता को स्वयं जाकर दूध पिलाएं और उनकी सेवा करें।

- मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण बाधा हो तो घर में बुजुर्ग, महिलाओं का सम्मान करें और चांदी की अंगूठी या कड़ा पहनें।

- बुध ग्रह के कारण आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो किसी चांदी के आभूषण का दान करें।

- गुरु के प्रभाव के कारण तरक्की में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो प्रतिदिन पीली गाय को गुड़-चने खिलाएं।

- यदि शुक्रग्रह के कारण आपको बाधा हो तो रोज घर की बुजुर्ग स्त्रियों के चरण स्पर्श करें।

- राहु के प्रभाव के कारण व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो तो लाल गुंजा व सौंफ को लाल वस्त्र में बांधकर अपने कमरे में रखें।

- केतु का अशुभ प्रभाव हो तो रोज कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं।

गंगा स्नान की चाह है तो सिर पर रुद्राक्ष रख यह मंत्र बोल नहाएं

हिन्दू धर्म में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है। यह देव नदी भी मानी गई है। क्योंकि पौराणिक मान्यताओं में गंगा स्वर्ग से भू-लोक में जगत कल्याण के लिए राजा भगीरथी के घोर तप से आई। इस दौरान गंगा के अलौकिक वेग को भगवान शंकर ने अपनी जटाओं से काबू किया। यही कारण है कि युग-युगान्तर से गंगा पावन और मोक्ष देने वाली मानी जाती है। वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो चुका है कि गंगा का जल पवित्र और रोगनाशक है।

यही कारण है कि धर्म में आस्था रखने वाले अनेक लोग गंगा स्नान की गहरी चाहत रखते हैं। इनमें कुछ लोगों की गंगा स्नान चाहत पूरी होती है, लेकिन कुछ जिम्मेदारियों या व्यस्तता के चलते गंगा स्नान से वंचित रहते हैं। इसलिए ऐसे ही आस्थावान लोगों के लिए यहां बताया जा रहा है शास्त्रों में लिखी बातों पर आधारित वह तरीका जो गंगा स्नान के समान ही माना गया है। डालते हैं एक नजर-

शास्त्रों में गंगा स्नान के पुण्य और सुख पाने का यह उपाय है रुद्राक्ष को सिर पर रखकर नीचे बताए मंत्र बोलकर स्नान करना। जिसके लिए एक रुद्राक्ष सिर पर धारण करें। इसके बाद स्नान के लिए जल सबसे पहले सिर पर डालें और यह मंत्र बोलें -

रुद्राक्ष मस्तकै धृत्वा शिर: स्नानं करोति य:।

गंगा स्नान फलं तस्य जायते नात्र संशय:।।

इसके अलावा ऊँ नम: शिवाय यह मंत्र भी मन ही मन स्मरण करें। इस मंत्र में रुद्राक्ष को सिर पर रखकर स्नान का फल गंगा स्नान के समान बताया गया है। स्नान का यह तरीका तन के साथ मन को भी पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

Thursday, April 28, 2011

अगर उधार और कर्ज से बचना है तो...

ज्योतिष में बुध ग्रह को कर्ज, उधार और बिजनेस का स्वामी और कारक ग्रह माना गया हैं। बुध के शुभ प्रभाव से जातक को मान सम्मान मिलता है। बुध के प्रभाव से भाषण देना, बिक्री बढ़ाने की कोशिशें, किसी उत्पादन का प्रचार करना, मार्केटिंग, अभिनय, मॉडलिंग आदि कामों में सफलता मिलती है। ऐसा जातक सफल बिजनेस मेन बन जाता है। लाल किताब के अनुसार बुध दुसरे ग्रहों के फल को जातक तक पहुंचाता है। यदि कुंडली में बुध अशुभ होता है तो बने बनाएं काम बिगाड़ जाते है। कुंडली में बुध अच्छी स्थिति में होता है तो, महापुरुष योग भी बनाता है। राजयोग और बुधाआदित्य नाम के शुभ योग भी बुध के कारण बनते है।



उधार और कर्ज से बचने के लिए उपाय-

मेष- घोड़े को हरा चारा खिलाए या रोगीयों को औषधि का दान दें।

वृष- विद्यार्थियों को अध्ययन की सामग्री दान दें।

मिथुन- हरे पौधों को पानी दें या तोते को हरी मिर्च खिलाए।

कर्क- 10 वर्ष से कम उम्र वाली कन्या को मिठाई खिला कर भेंट दें।

सिंह- किन्नर को हरी चुडिय़ां दान दें।

कन्या- गाय को हरे मूंग खिलाए और हरे वस्त्र पहनें।

तुला- जरूरतमंद को हरे वस्त्र दान दें।

वृश्चिक- कुल देवी देवता को कांसे का दीपक लगांए।

धनु- जीवनसाथी को आभूषण या पन्ना रत्न पहनाएं।

मकर- किसी को ऋण दें या ऋण दिलाने में मदद करें।

कुंभ- किसी वृद्ध को हरे वस्त्र का दान दें।

मीन- गणेश जी को दूर्वा चढ़ाए।

क्या और क्यों ध्यान रखे, जब जा रहे हों किसी खास काम के लिए?

जब भी हम घर से किसी खास कार्य को लक्ष्य बनाकर निकलते हैं उस वक्त सीधा पैर पहले बाहर रखने से निश्चित ही आपको कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यह परंपरा काफी पुरानी है जिसे हमारे घर के बुजूर्ग समय-समय पर बताते रहते हैं। इस प्रथा के पीछे मनोवैज्ञानिक और धार्मिक कारण दोनों ही हैं।

धर्म शास्त्रों के अनुसार सीधा पैर पहले बाहर रखना शुभ माना जाता है। सभी धर्मों में दाएं अंग को खास महत्व दिया गया है। सीधे हाथ से किए जाने वाले शुभ कार्य ही देवी-देवताओं द्वारा मान्य किए जाते हैं। देवी-देवताओं की कृपा के बिना कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। इसी कारण सभी पूजन कार्य सीधे हाथ से ही किए जाते हैं।

जब भी घर से बाहर जाते हैं तो सीधा पैर ही पहले बाहर रखते हैं ताकि कार्य की ओर पहला कदम शुभ रहेगा तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।इस परंपरा के पीछे एक तथ्य और है कि इसका हम पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। सीधा पैर पहले बाहर रखने से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मन प्रसन्न रहता है। इस बात का हम पर दिनभर प्रभाव रहता है। बाएं पैर को पहले बाहर निकालने पर हमारे विचार नकारात्मक बनते हैं।

3, 12, 21 या 30 को जन्मे लोग होते हैं मनमौजी


जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की तारिख 3, 12, 21, 30 को हुआ हैं वे सभी अंक 3 के व्यक्ति माने जाते हैं। अंक 3 वाले लोग काफी महत्वकांक्षी होते हैं।

अंक तीन या 3 का ग्रह स्वामी गुरु अर्थात बृहस्पति है, ज्योतिष और न्यूमरोलॉजी के अनुसार इस अंक से संबंधित लोगों पर बृहस्पति विशेष रूप से प्रभावित करता है। यह लोग अधिक समय तक किसी के अधीन कार्य करना पसंद नहीं करते, ये उच्च आकांक्षाओं वाले होते हैं। इनका लक्ष्य उन्नति करते जाना होता है, अधिक समय एक जगह रुककर यह कार्य नहीं कर सकते। इन्हें बुरी परिस्थितियों से लडऩा बहुत अच्छे से आता है।

इस अंक के व्यक्ति बहुत भावुक होते हैं और अनुशासन बहुत पसंद करते हैं। जीवन में हर समय खुश रहना और दूसरों को खुश रखना ही इनका लक्ष्य होता है, यह स्वभाव से बहुत मनमौजी होते हैं। अपने से बड़ों के आदेशों पालन करते हैं और चाहते हैं कि इनके आदेशों का भी पालन उसी तरह किया जाए।

अंक 3 के लोग हर क्षेत्र में ऊंचाई पर पहुंचते हैं। इन्हें मेहनत अधिक करना होती है परंतु अंतत: सफलता प्राप्त कर लेते हैं। कभी-कभी ये तानशाही भी करने लगते हैं इसी वजह से इनके कई विरोधी हो जाते हैं। अति स्वाभीमानी और दूसरों के प्रति आभार मानना भी इन्हें पसंद नहीं होता।

- इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं।

- हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारिखें इनके लिए विशेष रूप से लाभदायक हैं।

- इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।

- रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते है।

कैसी भी परेशानी हो, शिवजी की इस पूजा से दूर करें...

यदि आपका व्यवसाय ठीक से नहीं चल रहा, धन हानि हो रही है या आप नौकरी में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो शिवजी का पूजन सर्वश्रेष्ठ है। शिवजी को निम्र विधि से पूजें, आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएगी।

शिव पूजन की विधि

व्यापार एवं नौकरी या अन्य किसी समस्या को दूर करने के लिए सर्वप्रथम मिट्टी के शिवलिंग का बाएं हाथ में निर्माण करें। हाथ के नीचे एक थाली रख लें। इसके बाद दाहिने हाथ से शिवजी का पूजन करें। शिवजी को भस्म, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य बताएं। बिल्वपत्र अर्पण करके शिवमहिम्न स्तोत्र अथवा रुद्राष्टक पाठ के साथ जल मिश्रित दूध धारा से अभिषेक करें। दोनों पाठ याद नहीं हो तो 10 मिनट तक ओम नम: शिवाय का मंत्र जप के साथ अभिषेक करें। साथ ही 11 बिल्वपत्र ओम नम: शिवाय बोलकर अर्पण करें। बिल्वपत्र कोमल हो तथा डंठल ज्यादा नहीं होना चाहिए। तीन पत्ते की बिल्वपत्र ही शिवजी को अर्पित करें। यह क्रम सोमवार से शुरू होकर 40 दिन तक होना चाहिए। इससे व्यापार एवं नौकरी में निश्चित सफलता प्राप्त होगी।

एक अन्य उपाए-

ओम श्री श्रियै नम: मंत्र के साथ 108 बिल्वपत्र गाय के घी में डुबोकर प्रज्जविलत अग्नि से आहुति देने से लक्ष्मी वृद्धि, व्यापार वृद्धि, नौकरी में सुगमता होती है।

प्रयोग विधि: पलाश की लकड़ी में प्रज्जवलित अग्नि में 21 दिन तक नित्य हवन करने से सफलता मिलती है

Wednesday, April 27, 2011

इंटरव्यू में सुनिश्चित सफलता के लिए बोलें यह चौपाई

परीक्षा न केवल किसी इंसान की काबिलियत और क्षमताओं की परख होती है, बल्कि वह इंसान को मानसिक और वैचारिक रूप से मजबूत बनाती है। यही नहीं इसमें सफलता आत्मविश्वास के साथ जीवन के नियत लक्ष्य को भेदने मे अहम योगदान देती है।

आज के दौर में भी कामयाबी और शौहरत की चाह में विद्यार्थी हो या प्रोफेशनल परीक्षा या इंटरव्यू का सामना करते हैं। जिसके लिए पूरी तैयारी के बावजूद भी मन व मस्तिष्क पर दबाव व तनाव बना रहता है। जिसके कारण अनेक बार उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल पाते। ऐसी ही स्थिति से बचने के लिए जहां पुख्ता तैयारी और आत्मविश्वास तो जरूरी है लेकिन धर्म में आस्था और ईश्वर का स्मरण भी ऐसी शक्ति होती है, जो हर स्थिति में आपको डांवाडोल होने से बचा सकती है।

हिन्दू धर्म ग्रंथ रामचरितमानस में राम वनवास भी व्यावहारिक सूत्र सिखाता है कि जीवन के इम्तेहान में मानसिक और शारीरिक क्षमताओं के दम पर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है? धार्मिक दृष्टि से रामचरितमानस की हर चौपाई का स्मरण पुण्य के साथ अनेक कष्ट बाधाओं को दूर करता है। इसी कड़ी में अरण्यकाण्ड में आई यह चौपाई मन से भय, संशय, शोक का अंत करने वाली मानी गई है।

खासतौर पर किसी परीक्षा या इंटरव्यू के लिए निकलने से पहले भगवान श्रीराम की सामान्य पूजा कर इस चौपाई का पूरी आस्था से स्मरण सुनिश्चित सफलता देने वाला माना गया है -

- भगवान श्रीराम की यथासंभव गंध, अक्षत, फूल, धूप या अगरबत्ती से पूजा कर अरण्यकाण्ड की यह चौपाई बोलें-

संशय सर्प ग्रसन उरगाद:। शमन सुकर्कश तर्क विषाद:।।

भव भंजन रंजन सुर यूथ:। त्रातु सदा नो कृपा वरूथ:।।

इस चौपाई में सुतीक्ष्ण मुनि द्वारा राम की स्तुति की गई है। इसका अर्थ है जो संशयरूपी सर्प को ग्रसने के लिए गरुड़ हैं, अत्यन्त कठोर तर्क से पैदा होने वाले विषाद का नाश करने वाले हैं, आवागमन को मिटानेवाले और देवताओं के समूह को आनन्द देने वाले हैं, वे कृपा के समूह श्रीरामजी सदा हमारी रक्षा करें।

काली हल्दी से बनते हैं बिगड़े काम

हल्दी के बारे में हम सभी जानते हैं। इसका प्रयोग मसाले के रूप में होता है साथ ही पूजा-पाठ में भी इसका उपयोग किया जाता है। हल्दी की एक प्रजाति ऐसी भी है जिसका उपयोग तांत्रिक क्रियाओं के लिए किया जाता है, वह है काली हल्दी। काली हल्दी को धन व बुद्धि का कारक माना जाता है। काली हल्दी का सेवन तो नहीं किया जाता लेकिन इसे तंत्र के हिसाब से बहुत पूज्यनीय और उपयोगी माना गया है। यह अनेक तरह के बुरे प्रभाव को कम करती है। काली हल्दी से संबंधित कुछ टोटके इस प्रकार हैं-

टोटके

- काली हल्दी के 7 से 9 दाने बनाएं। उन्हें धागे में पिरोकर धूप, गूगल और लोबान से शोधन करने के बाद पहन लें। जो भी व्यक्ति इस तरह की माला पहनता है वह ग्रहों के दुष्प्रभावों से व टोने- टोटके व नजर के प्रभाव से सुरक्षित रहता है।

- गुरु पुष्य योग में काली हल्दी को सिंदूर में रखकर धूप देने के बाद लाल कपड़े में लपेटकर एक सिक्के के साथ वहां रख दें जहां आप पैसे रखते हैं। इसके प्रभाव से धन की वृद्धि होने लगती है।

- यदि आप किसी भी नए कार्य के लिए जा रहे है तो काली हल्दी का टीका लगाकर जाएं। यह टीका आपको सफलता दिलाएगा।

- यदि आप किसी को आकर्षित करना चाहते हैं तो प्रतिदिन काली हल्दी का तिलक लगाएं। किसी को भी आकर्षित करने के लिए काली हल्दी का तिलक एक सरल तांत्रिक उपाय है।

- काली हल्दी का चूर्ण दूध में डालकर चेहरे और शरीर पर लेप करने से त्वचा में निखार आ जाता है।

राशि अनुसार कौन सा पौधा खत्म करेगा सारे दोष...

अगर आपके घर में शांति नही है, हमेशा घर का कोई न कोई सदस्य बीमार रहता है, पैसा नहीं टिकता हो या जीवनसाथी से हमेशा अनबन होती रहती हो तो, आपको अपने राशि स्वामी को प्रसन्न करने के लिए अपनी राशि के अनुसार पेड़-पौधे लगाना चाहिए।



कौन सा पौधा है आपकी राशि का

- मेष और वृश्चिक राशि वाले जातक को मंगल देव के लिए लाल फल-फूल वाले पेड़ पौधे लगाना चाहिए।

- वृष और तुला राशि के जातकों का राशि स्वामी शुक्र होता है इसलिए उन्हें सफेद फल-फूल वाले बड़े पेड़ पौधे लगाने से लाभ होगा।

- कन्या और मिथुन राशि के जातक बुध ग्रह के अनुसार बिना फ ल और बिना फूल वाले छोटे पौधे लगा सकते है।

- कर्क राशि वाले लोगों का राशि स्वामी चंद्रमा होता है, इसलिए उन्हें अपने बगीचे में तुलसी या अन्य छोटे-छोटे औषधीय पौधे लगाएं और उसमें प्रतिदिन पानी दें।

- सिंह राशि वालों को लाल रंग के फूल वाले बड़े पेड़ या आकड़े का पेड़ लगाने से लाभ होगा।

- धनु और मीन राशि बृहस्पति देव की राशि है इसलिए इस राशि के जातकों को पीले फल वाले वज्रदंती या पीपल के पेड़ लगाना चाहिए।

- मकर और कुंभ राशि के व्यक्ति अपने राशि स्वामी शनि के अनुसार बिना फल-फूल वाले पेड़ पौधें लगाएं।



सभी पेड़-पौधे पूरब दिशा में लगाने चाहिए। ग्रह के बुरे प्रभाव से बचने के लिए वायव्य कोण में यानी पश्चिम और उत्तर दिशा के बीच में भी कुछ बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं।

ऐसी हैंडराइटिंग वाले हमें तुरंत करें लेते हैं मोहित

सभी की उत्सुकता का एक विषय है दूसरों लोगों का स्वभाव जानने का। सामान्यत: सभी चाहते हैं कि उन्हें मालुम हो कि उनके आसपास के लोगों के कैसे विचार हैं? उनका रहन-सहन कैसा है या उनमें क्या गुण हैं या क्या दोष हैं? ज्योतिष के अनुसार किसी भी व्यक्ति का स्वभाव मालुम किया जा सकता है। इसके लिए कई प्रकार की विद्याएं बताई गई हैं। इन्हीं में से एक हैं हैंड राइटिंग से स्वभाव जानना।

किसी भी व्यक्ति की लिखावट देखकर भी व्यक्ति का स्वभाव मालुम किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति बड़े-बड़े अक्षर लिखता है तो वह आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होता है। ऐसे लिखने वालों से उसके आसपास रहने वाले लोग बहुत ही जल्द प्रभावित हो जाते हैं। जिस व्यक्ति की हैंडराइटिंग बड़े-बड़े शब्द लिखने वाली है वे दिखावे में ज्यादा विश्वास रखते हैं साथ ही उन्हें दूसरों पर प्रभाव जताना काफी पसंद होता है। ये लोग हमेशा प्रसन्न रहते हैं और इन्हें अधिक बोलना पसंद होता है। इन लोगों के मित्रों की संख्या भी अधिक होती है। यह सभी कार्य पूरे दिल से करते हैं। भावुक होने के कारण कई बार अन्य लोग इनका फायदा भी उठा लेते हैं।


गौमूत्र से दूर करें घर के दोष, खुश रहेंगे...

हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में गौ को माता का दर्जा दिया गया है। साथ ही गाय की पूजा को सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली बताया गया है। वास्तु के अनुसार गौमूत्र से घर के सभी वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं और परेशानियां दूर हो जाती हैं।

वैसे तो गाय की पूजा से ही हमारे कई जन्मों के पाप स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं लेकिन गौमूत्र का काफी महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार गाय में तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है इसी वजह से गौ को पूजनीय और पवित्र माना गया है। गाय से मिलने वाली हर चीज का धार्मिक महत्व है। गौमूत्र को आयुर्वेद और धर्म में काफी गुणकारी बताया गया है।

आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का कई बीमारियों में दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। वहीं धर्म के अनुसार इससे घर की पवित्रता बनी रहती है। यदि हमारे घर में किसी प्रकार का कोई वास्तु दोष हो तो प्रतिदिन घर में गौमूत्र का छिड़कने से वे सभी दोष दूर हो जाते हैं। घर में सुख-शांति बनी रहती है। परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम बढ़ता है और वातावरण भी सूक्ष्म कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है।

घर के वातावरण में मौजूद कई प्रकार के हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु गौमूत्र के प्रभाव से नष्ट हो जाते हैं। इससे परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होता है। जिस घर में प्रतिदिन गौमूत्र का छिड़का जाता है वहां सभी देवी-देवताओं की कृपा बरसती है। जिससे वहां कभी धन या धान्य की किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती।

अगर आपका जन्म रात में हुआ है तो..

रात में जन्म लेने वाले लोग निडर और दुस्साहसी होते है। ये जोखिम भरे काम करने के शौकिन होते है। कोई भी काम शुरू करने पर उसे अधुरा नही छोड़ते। रात को जन्में लोग स्वभाव से तो आलसी होते है लेकिन हर काम को जुनून के साथ पूरा करते है। ऐसे लोग भावनात्मक न होकर कर्म प्रधान होते है। इनको जीवन में हार बर्दाश्त नही होती। ऐसे लोग किस्मत बहुत कम भरोसा करते है। इनके इरादे बुलंद होते हैं।

ज्योतिष के अनुसार जिन व्यक्तियों का जन्म रात के समय होता है। वे कम बोलने वाले होते हैं, यानी चुप रहना पसंद करते हैं। लेकिन इनका मन हमेशा अशांत रहता है। रात को जन्म लेने वाले लोग मन ही मन कुछ योजनाएं या षडयंत्र बनाते रहते है। ये कामी होते हैं, परायी स्त्रियों के प्रति इनमें आकर्षण अधिक होता है। तामसिक यानि नकारात्मक शक्तियों का इन पर विशेष प्रभाव होता है इस कारण ये अधिक गुस्सा करने वाले होते है। ऐसे लोग अनुचित तरिके से धन कमाने में नही हिचकिचाते। ये लोग हमेशा अपने स्वास्थ्य और शारीरिक परेशानियों को लेकर चिन्तित रहते है।



ऐसे उपाय करें-

- शिवलिंग की पूजा करें और कच्चा दूध चढ़ाएं।

- गरीब ब्राह्मण को भोजन कराएं।

- 9 वर्ष से कम उम्र की कन्या को भोजन कराएं और दान दें।

- काली गाय को चारा खिलाएं।

- रोज सूर्य को जल चढ़ाएं।

- अपने कुल के देवी देवताओं की पूजा करें।

- काले कुत्ते को रोटी दें।

- चींटीयों को आटा और चीनी डालें।

किसी भी वक्त बोलें यह मंत्र, सध जाएंगे सब काम

आज की व्यस्त जिंदगी में इंसान के पास काम, जिम्मेदारियों और जरूरतों को पूरा करने की उलझन में ईश्वर स्मरण के लिए वक्त निकालना मुश्किल है। हालांकि धर्मग्रंथों में लिखी बातें कर्म को पूजा का दर्जा देती हैं। किंतु कर्म के साथ-साथ ईश्वर भक्ति और कृपा को भी सफल जीवन का सूत्र भी माना गया है।

यही कारण है कि हम यहां बता रहे हैं धर्मग्रंथों का एक ऐसा सरल और असरदार मंत्र जो देव पूजा के अलावा कार्य और जिम्मेदारियों के दौरान किसी भी वक्त मन ही मन स्मरण करने पर सारे काम बिना बाधा और परेशानी के पूरे करने वाला माना गया है।

यह मंत्र भगवान विष्णु के साथ उनके अवतार श्रीकृष्ण का स्मरण है। वर्तमान में चल रहा वैशाख माह भी इन दोनों देवताओं की उपासना का विशेष काल है। इसलिए इस मंत्र का स्मरण बहुत ही शुभ फल देने वाला होगा। जानते हैं यह मंत्र -

- सुबह स्नान के बाद यथासंभव पीले वस्त्र पहनकर देवालय में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा गंध, अक्षत, पीले फूल व धूप, दीप से करें।

- पूजा के बाद इस मंत्र का यथाशक्ति जप करें। यही मंत्र दिन में किसी भी वक्त काम के दौरान ध्यान भी कर सकते हैं -

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।

कर्म की अहमियत बताने वाले भगवान श्रीकृष्ण और शांतिस्वरूप भगवान विष्णु के ध्यान से आपका हर काम न केवल निर्विघ्र संपन्न होगा, बल्कि शांति और सुकून भी लाएगा।

अक्षय तृतीया 6 मई को, इस उपाय से बरसेगी धन लक्ष्मी

तंत्र शास्त्र के अंतर्गत धन प्राप्ति के टोने-टोटकों के लिए कुछ विशेष मुहूर्त बताए गए हैं जैसे-दीपावली, धनतेरस व अक्षय तृतीया आदि। इस समय किए गए टोने-टोटके विशेष लाभ देते हैं। इस बार अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज भी कहते हैं, 6 मई, शुक्रवार को है। टोने-टोटके के लिए यह विशेष समय है। धन प्राप्ति के लिए इस दिन यह टोटका करें-

टोटका

अक्षय तृतीया की रात को साधक लाल लंगोट पहनकर, लाल आसन पर खड़ा होकर, सिंदूर का तिलक लगाकर लक्ष्मी यंत्र को अपनी बाईं हथेली में ले और दाएं हाथ में कमल गट्टे या स्फटिक की माला लेकर नीचे लिखे मंत्र का 21 माला जप करें।

मंत्र

अघोर लक्ष्मी मम गृहे आगच्छ स्थापय तुष्टय पूर्णत्व देहि देहि फट्



इस प्रकार पूरे विधि-विधान से यदि मंत्र का जप करें तो शीघ्र ही व्यक्ति धनवान हो जाता है। इसमें कोई शंका नहीं है

तारीफ पाना है तो जप करें इस मंत्र का

यह अनुभव की बात है कि कई बार जहां इंसानी प्रयास सफ ल नहीं होते, वहां कोई तंत्र-मंत्र चमत्कार कर देते हैं। अपने विरोधियों अथवा शत्रुओं को शांत करने, अपने अनुकूल बनाने अथवा अपने वश में करने के लिये, नीचे दिये गए मंत्र का नियमबद्ध जप करना आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाता है-



मंत्र-

।। नृसिंहाय विद्महे, वज्र नखाय धी मही तन्नो नृसिहं प्रचोदयात् ।।



इस मंत्र का जप सूर्योदय से पूर्व शांत एवं एकांत स्थान पर करें तो इसका फल शीघ्र ही मिलता है

दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देते हैं ये उपाय

हर इंसान अपने दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना चाहता है लेकिन दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं होता। क्योंकि जब समय बुरा होता है तो साया भी साथ छोड़ देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो नीचे लिखे उपाय करें। यह उपाय आपके दुर्भाग्य कौ सौभाग्य में बदल देंगे।

उपाय

1- नए कार्य, व्यवसाय, नौकरी, रोजगार आदि शुभ कार्यों के लिए जाते समय घर की कोई महिला एक मुठ्ठी काले उड़द उस व्यक्ति के ऊपर से उतार कर भूमि पर छोड़ दे तो हर कार्य में सफलता मिलेगी।

2- गरीब, असहाय, रोगी व किन्नरों की सहायता दान स्वरूप अवश्य करें। यदि संभव हो तो किन्नरों को दिए पैसे में से एक सिक्का वापस लेकर अपने कैश बॉक्स या लॉकर में रखें। इससे बहुत लाभ होगा।

3- काली हल्दी की एक गांठ शुभ मुहूर्त में प्राप्त कर अपने घर में, व्यवसायी अपने कैश बॉक्स में तथा व्यापारी अपने गल्ले में रखें।

4- रवि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बहेड़े की जड़ या एक पत्ता तथा शंखपुष्पी की जड़ लाकर घर में रखें। चांदी की डिब्बी में रखें तो और भी शुभ रहेगा।

5- बरगद(बड़) के पत्ते को गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें।

6- घर के मुख्य द्वार के ऊपर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं कि उनका मुख घर के अंदर की ओर रहे। उस पर सुबह दूर्वा अवश्य अर्पित करें।

7- धन संबंधी कार्य सोमवार एवं बुधवार को करें।

बिना पूजा पाठ करें भी हो सकती है गृह शांति

आपके घर में रहने वाले सदस्यों में हमेशा अनबन रहती है, कोई सदस्य हमेशा बीमार रहता है। सारा पैसा बीमारी में चला जाता है या घर में पैसों की बरकत नही होती है। आपके घर में शांति नही है तो बिना पूजा पाठ एवं तंत्र मंत्र से आप गृह शांति कर सकते है। अगर आप राशि के अनुसार कुछ छोटे छोटे प्रयोग करें तो निश्चित ही आपके घर में शांति हो जाएगी।



किस राशि वाले क्या उपाय करें?

मेष- मेष राशि वाले लोग अपनी राशि के अनुसार घर में लाल गाय का गौमूत्र छीटें और शाम को गुग्गल का धूप दें।

वृष- आपकी राशि का स्वामी शुक्र है इसलिए आपको लक्ष्मी जी के मन्दिर में गाय का घी दान देना चाहिए।

मिथुन- अगर आप बुध से संबंधीत वस्तुओं का दान दें तो आपके घर में निश्चित ही शांति रहेगी। आप किन्नरों को हरे वस्त्र के साथ हरी चुड़ीयां दान दें।

कर्क- आप पर चंद्रमा का विशेष प्रभाव है चंद्रमा के शुभ प्रभाव के लिए आप 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।

सिंह- आपकी राशि का स्वामी सूर्य है और आप पर सूर्य का विशेष प्रभाव है। इसलिए आप रोज सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य को जल चढ़ाए।

कन्या- कन्या राशि वाले लोगों को गले हुए मूंग गाय को खिलाना चाहिए। इससे आपके धर में शांति बनी रहेगी।

तुला- आपकी राशि शुक्र की राशि है इसलिए आप नव विवाहित वधू को भोजन कराएं तो आप पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होंगी और घर में बरकत बनी रहेगी।

वृश्चिक- आपकी राशि का स्वामी मंगल है इसलिए आप रोज रात को तांबे के बर्तन में पानी भर कर उसे अपने सिरहाने रख कर सोए और सुबह कांटेदार वृक्ष में डाल दें तो आपके घर में शांति रहेगी और सारी नकारात्मकता खत्म हो जाएगी।

धनु- धनु राशि वाले गुरु के उपाय करें यानी रोज पीली गाय को चारा दें और हर गुरुवार को किसी ब्राह्मण को भोजन कराए।

मकर- घर मे शांति बनाए रखने के लिए आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काला कंबल दान दें।

कुंभ- आपकी राशि पर शनि देव का विशेष प्रभाव है इसलिए आप चिंटीयों को आटा और चिनी खिलाए।

मीन- अपनी राशि के अनुसार आपको रोज मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना चाहिए या दाना डालना चाहिए।

अगर आपको चाहिए प्रमोशन, तो करें यह उपाय...

भारत में अधिकांश लोगों की जीविका जॉब या नौकरी से ही चलती है। काफी बड़ा समूह ऐसा है जो किसी कंपनी, संस्था, व्यक्ति या सरकारी नौकरी से ही अपने परिवार का और अपना जीवन चला रहा है। ऐसे में नौकरी को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है। किसी भी कंपनी या संस्था में बने रहने के लिए कड़ी मेहनत के साथ ही अच्छी किस्मत की भी आवश्यकता होती है।

कई लोग ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी उचित वेतन या सुविधाएं प्राप्त नहीं कर पाते। जबकि कुछ लोग कम समय में कम मेहनत से ही ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं प्राप्त कर लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार इसकी वजह कुंडली में ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह शुभ प्रभाव देने वाले हैं तो वे हर क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ते हैं, जबकि अशुभ ग्रहों के प्रभाव से कड़ी मेहनत के बाद भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

अगर आप भी अपनी कंपनी में कोई ऊंचा पद प्राप्त करना चाहते हैं या किसी अन्य शहर में ट्रांसफर करना चाहते हैं और काफी प्रयासों के बाद सफलता नहीं मिल रही है तो यह उपाय करें। किसी भी रविवार से इस प्रयोग की शुरूआत करें। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर्म से निवृत्त होकर एक तांबे के लोटे में जल लें। अब लोटे में लाल मिर्ची के दाने डालें। इस जल से सूर्य को अर्ध्य दें। यह कार्य आपको रविवार से शुरू करके शनिवार तक करना है। इस कर्म से निश्चित ही कुछ समय में आपको इच्छा पूर्ण होने के योग बनेंगे

पैसों की तंगी दूर करना हो तो 6 मई को करें यह उपाय

आवश्यकताओं और सुविधाओं के बढऩे के साथ-साथ हम चाहे जितना पैसा कमा ले, कम ही है। धन की बढ़ती जरूरत के लिए अतिरिक्त कार्य करना होता है। फिर भी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में मेहनत के साथ-साथ धन की देवी लक्ष्मी की उपासना भी जाए तो व्यक्ति सभी ऐश्वर्य और सुख-शांति प्राप्त करता है।

यहां एक प्रयोग दिया जा रहा है जिसे अपनाने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं शत-प्रतिशत पूर्ण होती हैं-

प्रयोग की विधि:

- अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में इस प्रयोग को करें।

- स्नानादि से निवृत्त होकर साफ और पवित्र स्थान पर आसन बिछा लें और महालक्ष्मी का चित्र को अपने सामने स्थापित करें।

- महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने के पश्चात निम्न मंत्र का (11 मालाएं) जप करें:

मंत्र: ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं दारिद्रय विनाशके जगत्प्रस्त्यै नम:।।

- माला कमल के गट्टे की होनी आवश्यक है।

- इस दिन के पश्चात नित्य अपनी इच्छानुसार मंत्र का जप करें।

- 12 लाख मंत्र जप के पश्चात महालक्ष्मी सिद्ध हो जाती हैं और उपासक को अपार धन, समृद्धि, वैभव, यश, सुख और शांति प्राप्त हो जाती है। इस प्रयोग की सफल शुरूआत के कुछ ही दिनों में व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होना शुरू हो जाती है।

- प्रयोग पूरी श्रद्धा और भक्ति से करें। मन में कोई संदेह ना लाएं। अन्यथा इस प्रयोग का प्रभाव स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। यह प्रयोग अचूक है।

Tuesday, April 26, 2011

कैसे होते हैं वे लोग जिनकी जन्म तारीख है 2, 11, 20 या 29

अंक 2 का मतलब है जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 2, 11, 20, 29 हुआ हो, वे सभी अंक 2 वाले होते हैं। यह नंबर चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा के सभी गुण अंक 2 वाले में विद्यमान रहते हैं।

चंद्रमा किसी भी एक राशि में ढाई दिन ही रुकता है अत: चंद्रमा की चाल बहुत तेज है। चंद्रमा हमारे मन को शत-प्रतिशत नियंत्रित करता है। अंक 2 वालों का ग्रह स्वामी चंद्र है इस वजह से यह लोग मन से चंचल होते हैं। चंद्र के प्रभाव के कारण यह लोग रोमांस से भरपूर होते हैं।

अंक ज्योतिष के अनुसार इस अंक के लोगों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मक क्षमता काफी अधिक होती है। हर कार्य को अच्छे और बेहद ही आकर्षक तरीके से करते हैं। हर पल नया करने के लिए लालायित रहते हैं। यह लोग काफी रोमांटिक स्वभाव के होते हैं और विपरित लिंग के प्रति बहुत अधिक आकर्षित होते हैं। अन्य लोग भी इनके व्यक्तित्व और कार्यशैली से इन पर मोहित हो जाते हैं। अधिकांशत: इस अंक के लोग शारीरिक दृष्टि से अधिक बलवान न होते हुए सामान्य शरीर वाले होते हैं।

यह लोग अधिक समय तक एक जैसा जीवन नहीं जी सकते, इन्हें परिवर्तन काफी पसंद होता है। इनके कई मित्र होते हैं। मन की चंचलता के कारण इनका मन अधिकांश समय अस्थिर ही रहता है। विपरित परिस्थितियों में बहुत जल्द दुखी हो जाते हैं और कई बार हिम्मत भी हार जाते हैं। ऐसे में इनमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती है।

- इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार काफी शुभ दिन होते हैं।

- इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं।

- लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते।

- अंक 2 वालों को मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए

ऐसे लोग जीवनभर कमाते हैं पैसा

धन... पैसा... मनी... यह ऐसे शब्द हैं जिनके आगे पीछे दुनिया भाग रही है। अमीर और अमीर बनना चाहते हैं जबकि गरीब थोड़ा पैसा कमाने के लिए ही दिनरात मेहनत करते हैं फिर भी भाग्य साथ नहीं देता। कोई गरीब क्यों होता है और किसी अमीर के पास कितना पैसा होगा? यह ज्योतिष शास्त्र से जाना जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म पत्रिका का दूसरा भाव धन या पैसों से संबंधित होता है। इसी दूसरे भाव से व्यक्ति को धन, आकर्षण, खजाना, सोना, मोती, चांदी, हीरे, जवाहारात आदि मिलते हैं। साथ ही इसी से व्यक्ति को स्थायी संपत्ति जैसे घर, भवन-भूमि का कारक भी प्राप्त होता है।

- किसी की कुंडली में द्वितीय भाव पर शुभ ग्रह या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो उस व्यक्ति के अमीर बनने में कोई रूकावट नहीं होती है।

- यदि कुंडली में द्वितीय भाव में बुध हो तथा उस पर चंद्रमा की दृष्टि हो तो जातक धनहीन होता है वह जीवनभर मेहनत करते रहता हैं परंतु उसे ज्यादा धन की प्राप्ति नहीं होती है। वह गरीब ही रहता है।

- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय भाव पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो वह धनहीन होता है।

- यदि कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो अपार धन प्राप्ति का योग बनता है परंतु यदि उस पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो घर में भरा हुआ धन भी नष्ट हो जाता है।

- चंद्रमा यदि अकेला हो तथा कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति गरीब ही रहता है।

- यदि कुंडली में सूर्य, बुध द्वितीय भाव में स्थित हो तो धन स्थिर नहीं होता।

अधिक धन प्राप्ति के लिए यह उपाय करें:

- प्रतिदिन शिवलिंग पर जल, बिलपत्र और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।

- महालक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा करें।

- सोमवार का व्रत करें।

- सोमवार को अनामिका उंगली में सोने, चांदी और तांबे से बनी अंगुठी पहनें।

- शाम को शिवजी के मंदिर में दीपक लगाएं।

- पूर्णिमा को चंद्र का पूजन करें।

- श्रीसूक्त का पाठ करें।

- श्री लक्ष्मीसूक्त का पाठ करें।

- कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

- किसी की बुराई करने से बचें।

- पूर्णत: धार्मिक आचरण बनाएं रखें।

- घर में साफ-सफाई बनाएं रखें इससे धन स्थाई रूप से आपके घर में रहेगा

Monday, April 25, 2011

सुबह जागने पर यह मंत्र बोल जमीन पर रखें पैर, कदमों में होगी कामयाबी

पैर शरीर का अहम अंग है। जिसके बिना जीवन गतिहीन है। पैरों के बिना इंसान विवश और असहाय हो सकता है। हालांकि मजबूत इच्छाशक्ति के लोग बिना पैरों के भी जीवन को सफल बना लेते हैं। धर्मग्रंथों में भी वामन अवतार, अंगद का पैर जमाना, श्रीराम का अहिल्या उद्धार जैसे अनेक प्रसंगों में चरण यानी पैर ही कल्याणकारी, दंभ को तोडऩे वाले या पावनता का प्रतीक बनें।

यही कारण है कि जीवन को सफल बनाने की कोशिशों में यही पैर न डगमगा जाएं और बिन बाधाओं के आगे बढ़ते रहें, इस भावना के साथ हिन्दू धर्म शास्त्रों में इंसानी मन व जीवन के ज्ञान-विज्ञान को समझते हुए हुए सुबह जागने पर पैरों को जमीन पर रखते समय मंत्र विशेष द्वारा देव स्मरण का महत्व बताया गया है। ताकि देवकृपा से हर कदम सुरक्षित और कामयाबी की मंजिल तक पहुंचने वाला हो।

यह मंत्र विशेष रूप से मातृशक्ति का स्मरण है। शक्ति का ही स्वरूप देवी लक्ष्मी की उपासना सुख, धन और ऐश्वर्य देने वाली मानी गई है, जो हर इंसान की चाहत होती है। इस मंत्र में भी उनका ही स्मरण है। इसलिए सुबह जागने पर जमीन पर पैर रखते ही इस मंत्र का ध्यान रख कदम आगे बढ़ाएं -

समुद्र वसने देवी पर्वतस्तन मण्डले।

विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे।

इन उपायों से आएगी सुख-समृद्धि आपके घर

सुख और समृद्धि दोनों अलग-अलग है। यह आवश्यक नहीं है कि यदि आप समृद्ध हैं तो सुखी भी होंगे। दोनों का एक साथ मिलना बहुत मुश्किल होता है। क्योंकि अगर पैसा है तो उसके साथ अन्य बहुत ही परेशानियों भी रहती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर समृद्धि के साथ सुख का भी वास हो तो नीचे लिखे उपाय करें।

उपाय

1- चैक बुक, पास बुक, पैसे के लेन-देन संबंधी कागजात, पूंजी निवेश संबंधी कागजात आदि श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र आदि के समीप रखें।

2- व्यापार संबंधी लेखा-जोखा रखनी वाली किताब(रोकड़) पर केसर के छींटे अवश्य लगाएं।

3- दीपावली की रात या ग्रहण काल में एक लौंग, एक इलाइची जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को देवी-देवता के चित्र और यदि यंत्र हो तो उन पर लगा कर रखें।

4- किसी सूर्य के नक्षत्र में ऐसे पेड़ की टहनी तोड़ कर लाएं जिस पर चमगादड़ों का स्थाई निवास हो। इस टहनी को अपने बिस्तर के नीचे रख कर सोएं।

5- शाम के समय घर में झाड़ू-पोंछा न लगाएं।

6- गुरुवार के दिन किसी विवाहित महिला को सुहाग की सामग्री भेंट करें। संभव हो तो ऐसा हर गुरुवार को करें।

7- चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं।

अब हर दिन किस्मत देगी आपका साथ अगर...

ज्योतिष में सप्ताह के सात दिनों की प्रकृति और स्वभाव बताए गए हैं। इन सात दिनों पर ग्रहों का अपना प्रभाव होता है। अगर आप इन दिनों की प्रकृति और स्वभाव के अनुसार कार्यों को करें तो जरूर आपकी किस्मत साथ देगी। निश्चित ही हर काम में सफलता मिलेगी। अगर आपके सोचे हुए काम पूरे नही होते या उनका कोई परिणाम नही मिलता तो आप उन कार्यों को पुराणों, मुहूर्त ग्रंथों और फलति ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार बताए गए वार को करें। आप जरूर सफल होंगे।



जानिए किस दिन क्या करें..

रविवार- यह सूर्य देव का वार माना गया है। इस दिन नवीन गृह प्रवेश और सरकारी कार्य करना चाहिए। सोने के आभूषण और तांबे की वस्तुओं का क्रय विक्रय करना चाहिए या इन धातुओं के आभूषण पहनना चाहिए।

सोमवार- सरकारी नौकरी वालों के लिए पद ग्रहण करने के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। गृह शुभारम्भ, कृषि, लेखन कार्य और दूध, घी व तरल पदार्थों का क्रय विक्रय करना इस दिन फायदेमंद हो सकता है।

मंगलवार- मंगल देव के इस दिन विवाद एवं मुकद्दमे से संबंधित कार्य करने चाहिए। शस्त्र अभ्यास, शौर्य और पराक्रम के कार्य इस दिन करने से उस कार्य में सफलता मिलती है। मेडिकल से संबंधित कार्य और अॅापरेशन इस दिन करने से सफलता मिलती है। बिजली और अग्नि से संबधित कार्य इस दिन करें तो जरूर लाभ मिलेगा। सभी प्रकार की धातुओं का क्रय विक्रय करना चाहिए।

बुधवार- इस दिन यात्रा करना, मध्यस्थता करना, दलाली, योजना बनाना आदि काम करने चाहिए। लेखन, शेयर मार्केट का काम, व्यापारिक लेखा-जोखा आदि का कार्य करना चाहिए।

गुरुवार- बृहस्पति देव के इस दिन यात्रा, धार्मिक कार्य, विद्याध्ययन और बैंक से संबंधित कार्र्य करना चाहिए। इस दिन वस्त्र आभूषण खरीदना, धारण करना और प्रशासनिक कार्य करना शुभ माना गया है।

शुक्रवार- शुक्रवार के दिन गृह प्रवेश, कलात्मक कार्य, कन्या दान, करने का महत्व है। शुक्र देव भौतिक सुखों के स्वामी है। इसलिए इस दिन सुख भोगने के साधनों का उपयोग करें। सौंदर्य प्रसाधन, सुगन्धित पदार्थ, वस्त्र, आभूषण, वाहन आदि खरीदना लाभ दायक होता है।

शनिवार- मकान बनाना, टेक्रीकल काम, गृह प्रवेश, ऑपरेशन आदि काम करने चाहिए। प्लास्टिक , लकड़ी , सीमेंट, तेल, पेट्रोल खरीदना और वाद-विवाद के लिए जाना इस दिन सफलता देने वाला होता है।

चमत्कारी पेड़! जिसका रस रखेगा आपको महफूज़

सुना है कल्पवृक्ष के नीचे बैठ कर की गई हर इच्छा पूरी हो जाती है। लेकिन आज तक ऐसे किसी की खोज नहीं हो सकी है। लेकिन अभी-अभी एक ऐसे वृक्ष के बारे में पता चला है जिसे प्रकृति ने एक अनोखी खाशियत से नवाजा है। इस पैड़ की खाशियत इसके फूलों में छुपी है। क्योंकि इसके फूलों से बना शहद दुनिया के सर्वोत्तक एंटीबॉयोटिक का काम करता है।

इस विलक्षण पैड़ का नाम है-मनुका, और यह न्यूज़ीलैंड के जंगलों में पाया जाता है।

वेल्स यूनिवर्सिटी द्वारा किये गए शोध से पता चला है कि इस पैड़ के फूलों से बना शहद बेहद असरदार होता है। इस शहद को मधुमक्खियां न्यूज़ीलैंड के मनुका वृक्षों से पराग इक_ा करके बनाती हैं। पूरी दुनिया में ज़ख्मों के इलाज के लिए इस शहद का पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पेड़ का शहद भर देगा हर जख्म। शोधकर्ता, मनुका पैड़ से बने शहद में मौजूद बैक्टीरिया से लडऩे की क्षमता को और बेहतर तरीक़े से जान लेना चाहते थे ताकि हमारे अस्पतालों में पाए जाने वाले कुछ बेहद मुश्किल बैक्टीरिया संक्रमणों से निपटा जा सके।

सबसे सामान्य बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोक्की और स्यूडोमोनड्स पर किए प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि मनुका पैड़ से निर्मित शहद बैक्टीरिया को कोशिकाओं तक पहुंचने से रोक देता है जो कि किसी भी गंभीर संक्रमण की शुरुआत की सबसे अहम कड़ी होती है.

प्रयोगों के आधार पर ये संकेत मिलता है कि दवाओं को बेअसर करनेवाले संक्रमणों के इलाज के लिए मनुका शहद को अगर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाए तो ये ज़्यादा असरदार साबित हो सकता है

परिवार में झगड़े होते हैं तो इस मंत्र का जप करें

परिवार में प्रेम होना बहुत आवश्यक है। यदि परिवार में प्रेम नहीं होगा तो घर बिखरते देर नहीं लगती। आज के समय ऐसे अनेक मामले सामने आते हैं जब जरा सी बात के चलते अच्छे-भरे परिवार बिखर जाते हैं। कभी सास-बहू में नहीं बनती तो कभी भाई-भाई एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। पति-पत्नी में विवाद तो आम बात हो गई है। यदि परिवार में रोज-रोज होने वाले इन झगड़ों से छुटकारा पाना है तो नीचे लिखे मंत्र का विधि-विधान से जप करें।



मंत्र

ध्रां ध्रीं ध्रूं ध्रूर्जटे:। ब्रां ब्रीं ब्रूं बागधीश्वरी।

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि। श्रां श्रीं श्रूं में शुभं कुरू।।



जप विधि

- किसी शुक्रवार/नवरात्रि या अन्य कोई शुभ मुहूर्त देखकर इस मंत्र का जप करें।

- सुबह जल्दी उठकर मां काली या दुर्गा के चित्र पर लाल फूल अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं। संभव हो तो काली यंत्र का भी पूजन करें।

- इस मंत्र का रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। आसन कुश का उपयोग में लें।

- 21 दिनों में परिणाम मिल जाएगा। यदि लाभ होता दिखाई दे तो मंत्र जप प्रतिदिन भी कर सकते हैं। परिवार में सुख का वातावरण बनेगा

Sunday, April 24, 2011

इस मंत्र से पाएं धन, दौलत व शौहरत

वर्तमान समय में धन इंसान की सबसे बड़ी व महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। सभी चाहते हैं कि उन पर लक्ष्मी की कृपा हो। उनके पास जो लक्ष्मी आए वो उन्हें कभी छोड़कर ना जाए और घर हमेशा धनधान्य से पूर्ण हो, यदि आप भी यही चाहते हैं तो नीचे लिखे लक्ष्मी प्राप्ति के मंत्र का विधि-विधानपूर्वक जप करने से आप भी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इस मंत्र से धन-दौलत व शौहरत सभी कुछ पाया जा सकता है। रामरक्षा स्तोत्र का लक्ष्मीदायक यह मंत्र धन प्राप्ति के लिए बहुत लाभदायक है।

मंत्र

आपदाम अपहर्तारम् दातारम् सर्व संपदाम्।

लोकाभिरामम् श्री रामम् भूयो-भूयो नमाम्यहम्।।



जप विधि

- सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें।

- इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें।

- माता लक्ष्मी की प्रतिमा का पूजन कर इस मंत्र का 5 माला जप करें।

- जप के लिए स्फटिक या कमल गट्टे की माला का प्रयोग करें

क्या आपको नौकरी की तलाश है? यह उपाय करें

आज के समय में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। चाहते तो सभी है कि उन्हें मनचाही नौकरी मिले लेकिन ऐसा होना संभव नहीं हो पाता। कई लोग नौकरी की तलाश में भटकते ही रहते हैं लेकिन फिर भी उनका यह सपना अधूरा ही रह जाता है। यदि आपके साथ भी यही समस्या है और योग्य होने पर भी यदि आपको नौकरी नहीं मिल रही है तो नीचे लिखे टोटके से आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा।

उपाय

- दीपावली/धनतेरस/नवरात्रि/ अक्षय तृतीय या अन्य किसी शुभ मुहूर्त के दिन सुबह जल्दी उठकर यह प्रयोग करें। सुबह स्नान आदि से कार्यों से निवृत्त होकर पूर्व दिशा में मुख करके कुश के आसन पर बैठें। कुश का आसन न हो तो ऊन का आसन भी उपयोग में ले सकते हैं।

- अपने सामने बाजोट (पटिए) पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उस पर चावल की ढेरी बनाकर गायत्री यंत्र स्थापित करें। अब सात गोमती चक्र हल्दी से रंग कर स्थापित करें। फिर धूप-दीप कर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 11 माला जप करें। जप समाप्त होने पर मावे का प्रसाद बच्चों में बांटें।

मंत्र

ऊँ वर वरदाय सर्व कार्य सिद्धि करि-करि ऊँ नम:

- इस पूजन सामग्री को सफेद वस्त्र में लपेटकर किसी कुएं अथवा तालाब में विसर्जित कर दें एवं बिना पीछे देखे लौट आएं। घर आकर पुन: स्नान करें। आप देखेंगे कि एक ही महीने के अंदर आपकी नौकरी मनचाहे स्थान पर लग जाएगी।

जानिए क्या कहते हैं आपके चेहरे के तिल...

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे माध्यम बताए गए हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति के भूत-भविष्य, वर्तमान और स्वभाव को आसानी से जाना जा सकता है। इन्हीं माध्यमों में से एक है शरीर पर होने वाले तिल से स्वभाव और भविष्य मालुम करना।


ज्योतिष अनुसार हमारे शरीर पर तिल होना भी भविष्य में होने वाली घटनाओं और सफलता या असफलता को दर्शाता है।

यदि आपके चेहरे पर तिल हैं तो जानिए, क्या कहते हैं ये तिल...

- यदि आपके माथे के दाहिनी ओर तिल है तो आपके पास धन हमेशा बढ़ता रहेगा। ऐसे लोगों के धन की कमी नहीं रहती है।

- माथे के बायीं ओर तिल संकट भरे जीवन की ओर इशारा करता है। इन लोगों को कड़ी मेहनत के बाद भी पर्याप्त धन की प्राप्ति हो पाती है।

- यदि ठुड्डी पर तिल है तो प्रेम संबंध में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

- दोनों भौहों पर तिल है तो आपका अधिकांश समय यात्रा में बितेगा।

- दाहिनी आंख पर तिल अच्छे प्रेम संबंध को दर्शाता है।

- बायीं आंख का तिल चिंता और दुख की ओर इशारा करता है।

- दाहिने गाल का तिल मतलब धनवान होने के योग हैं।

- बाएं गाल पर तिल निर्धनता का प्रतिक है।

- होंठ पर तिल वाले कामुक होते हैं।

- होंठ के नीचे तिल वाले निर्धनता की ओर इशारा करते हैं।

- कान पर तिल वाले व्यक्ति अल्पायु होते हैं

Friday, April 22, 2011

बिगड़े काम बनाता है यह गणेश मंत्र

हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा करने का विधान है लेकिन जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है तो सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है और शुभ कार्य ठीक से हो जाता है। यदि आपका भी कोई कार्य ठीक से नहीं हो रहा है तो नीचे लिखे मंत्र का जप करें। आपके सभी बिगड़े काम बन जाएंगे।

मंत्र

ऊँ गणेश एकदंत च हेरम्वं विघ्ननामकम्।।

लम्बोदरं शूपकर्णं गजवक्त्रं गुहाग्रजम्।।



जप विधि

- सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें।

- इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें।

- भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का पूजन कर इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है।

- जप के लिए हरे पन्नेकी माला का प्रयोग करें

भुगत रहे हैं गलत फैसलों की पीड़ा! तनाव दूर करेगें ये राहु मंत्र

हर इंसान जीवन में छोटी या बड़ी गलतियां करता है। किंतु जब कोई गलत फैसला उसे बड़ा नुकसान पहुंचाता दे तो उसके पछतावे या दु:ख में जीवन चैन से नहीं गुजरता। कुछ लोग संयम और धैर्य से ऐसी हालात से बाहर आ जाते हैं, किंतु कुछ लोगों का मन-मस्तिष्क आगे की न सोचकर उल्टे नुकसान की पीड़ा में ही उलझ जाता है। जिससे समय और ऊर्जा ही हानि होती है।

इससे बचने के लिए व्यावहारिक समझ तो जरूरी है ही किंतु अगर धार्मिक उपायों के बारे में बात करें तो ज्योतिष विज्ञान में ऐसी स्थिति के लिए राहु ग्रह के बुरे योग को कारण माना जाता है। राहु क्रूर ग्रह है, जिसका बुरा असर मानसिक अशांति, बेचैनी, कमजोर निर्णय क्षमता, भय, व्यग्रता, क्रोध, उत्तेजना और हिंसक भावना को बढ़ाने वाला होता है।

ऐसी गंभीर समस्यायों से निजात पाने के लिए शास्त्रों में शनिवार के दिन राहु मंत्रों का जप प्रभावी माना गया है। जानते हैं राहु मंत्र और पूजा की सरल विधि-

- शनिवार के दिन स्नान कर नवग्रह मंदिर में राहु पूजा के दौरान या पूरे दिन नीले या काले रंग के कपड़े पहनें।

- राहु पूजा में गंध, अक्षत, नीले फूल चढ़ाएं। देव रूप राहु को तिल्ली से बनी बर्फी या लड्डू, मीठी रोटी या मीठे चूरमे का भोग लगाएं।

- धूप सहित तिल के तेल का दीपक लगाकर राहु के नीचे बताए बीज मंत्र या तांत्रिक मंत्र की कम से कम तीन या 18 माला का जप करें।

पौराणिक मंत्र -

नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी करालवक्त्र: करवालशूली।

चतुर्भुजश्चक्रधरश्च राहु: सिंहाधिरूढो वरदोऽस्तु मह्यम॥

- तांत्रिक मंत्र

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं राहवे नम:

बीज मंत्र -

ॐ रां राहवे नम:

- अंत में दीप आरती कर सभी मानसिक दु:खों और परेशानियों से छुटकारे की कामना करें। साथ ही शाम के समय पीपल की जड़ में तेज का दीपक भी जलाएं।

अगर आपको चाहिए अच्छी नौकरी तो, 6 मई को करें यह उपाय

बढ़ती जनसंख्या के चलते नौकरी के लिए भी प्रतिस्पर्धा में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से अधिकांश लोगों को या तो जॉब नहीं मिल पाती या योग्यता के अनुसार अच्छी नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यदि आपको भी अपनी इच्छानुसार जॉब नहीं मिल पा रही है तो निम्न उपाय करें।

कई बार कुंडली में ग्रह दोष होने की वजह से अच्छी जॉब नहीं मिल पाती। यदि कुंडली में कोई ग्रह बाधा हो तो योग्य व्यक्तियों को भी सही नौकरी नहीं मिल पाती है। ऐसे में ज्योतिष के अनुसार संबंधित ग्रह का उचित उपचार या पूजन करना ही श्रेष्ठ रहता है। इसके लिए धन संबंधी कार्यों में महालक्ष्मी की कृपा अवश्य चाहिए।

महालक्ष्मी को मनाने के लिए अक्षय तृतीया पर यह उपाय करें-

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त हो जाएं। अब घर में किसी पवित्र और शांत स्थान में बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाएं और स्वयं पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठ जाएं। सफेद वस्त्र पर चावल की ढेरी बनाएं। इस ढेरी गायत्री यंत्र स्थापित करें। अब सात गोमती चक्र लें, इन्हें हल्दी से रंगकर पीला कर दें। इन्हें भी गायत्री यंत्र के साथ ही रखें। फिर धूप-दीप करके विधिवत पूजन करें और मावे की मिठाई का भोग लगाएं। पूजन के बाद 11 माला मंत्र (ऊँ वर वरदाय सर्व कार्य सिद्धि करि-करि ऊँ नम:) का जप करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्टे की माला का प्रयोग करें। जप समाप्ति के बाद मिठाई का प्रसाद घर के सभी सदस्यों और अन्य लोगों को दें।

अब समस्त पूजन सामग्री को सफेद कपड़े में बांधकर किसी तालाब, नदी, कुएं या अन्य पवित्र जल के स्थान पर विसर्जित कर आएं। ध्यान रहें घर लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें। घर लौटकर पुन: स्नान करें।

इस प्रयोग को करते समय मन में किसी प्रकार की शंका, संदेह लेकर न आएं अन्यथा उपाय निष्फल हो जाएगा। विधिवत पूजन के बाद जल्दी आपको अच्छी नौकरी मिलने की संभावनाएं बनने लगेंगी। ध्यान रहे इस दौरान किसी भी प्रकार के अधार्मिक कर्मों से खुद दूर ही रखें।

महाबली हनुमान के 5 छोटे मंत्र करें बड़ी से बड़ी मुश्किलों का अंत

रुद्रावतार श्री हनुमान को महाबली भी पुकारा जाता है। उनका यह नाम मात्र उनके वज्र के समान बलवान शरीर या अनेक शक्तियों के स्वामी होने के कारण ही नहीं बल्कि युग-युगान्तर से जारी हनुमान भक्ति और उनके प्रति आस्था का वह प्रभाव भी है, जो भक्तों को तन, मन और धन से सबल बनाती आ रही है।

श्री हनुमान भक्ति में विश्वास और आस्था को बल देने वाले ही ऐसे 5 मंत्र यहां बताए जा रहे हैं। चूंकि मानव जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा है, जिसमें दु:ख और सुख आते जाते हैं। इसलिए हर इंसान सुखों की चाहत और दु:खों से बचने के लिए देव उपासना करता है। ऐसे संकट, मुसीबतों और दु:खों से बचने के लिए ही श्री हनुमान के ये मंत्र अचूक माने गए हैं।

शनिवार के दिन श्री हनुमान की उपासना में इन मंत्रों का जप और भी असरदार होता है। क्योंकि शास्त्रों में हनुमान भक्ति ग्रहदोष शांति खासतौर पर शनि दशा के बुरे प्रभाव से बचने के लिए बहुत ही शुभ मानी गई है। इसलिए जानें महाबली हनुमान के इन मंत्रों और श्री हनुमान पूजा की सरल विधि -

- शनिवार के दिन सुबह स्नान करें। इस दिन शरीर, बोल और आचरण की पवित्रता का खास ध्यान रखें।

- देवालय या हनुमान मंदिर में श्री हनुमान की प्रतिमा पर चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाकर गंध, अक्षत, लाल फूल, श्रीफल यानी नारियल अर्पित करें।

- गुग्गल धूप लगाकर लाल आसन पर बैठकर इन हनुमान मंत्रो का जप करें-

- ॐ बलसिद्धिकराय नम:

- ॐ वज्रकायाय नम:

- ॐ महावीराय नम:

- ॐ रक्षोविध्वंसकाराय नम:

- ॐ सर्वरोगहराय नम:

- मंत्र जप के बाद यथासंभव श्री हनुमान चालीसा पाठ का पाठ करें। श्री हनुमान की दीप आरती करें।

- पूजा, मंत्र जप और आरती के दौरान हुए जाने-अनजाने दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना कर सारी परेशानियों और चिंतामुक्ति के लिए कामना करें।

धार्मिक मान्यता है कि श्री हनुमान के इन पांच मंत्रों के असर से रोग, शोक, दोष का अंत हो जाता है।

Thursday, April 21, 2011

मनचाही लड़की से विवाह बाधा दूर करे यह देवी मंत्र

यह उपाय है मातृशक्ति की उपासना। शुक्रवार या सामान्य दिनों में देवी के इस मंत्र के जप द्वारा कोई भी अविवाहित पुरुष मनपसंद स्त्री से विवाह में आ ही परेशानियों को दूर कर सकता है। इस देवी मंत्र का जप पूरी आस्था और पवित्रता से करें और व्यावहारिक जीवन में स्त्रियों के प्रति पूरे सम्मान के भाव रखें -

- सबेरे स्नान कर देवालय में माता देवी की पंचोपचार पूजा (गंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप आरती) पूजा करें और देवी के इस मंत्र का यथाशक्ति जप करें
पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।

तारिणी दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्‍भवाम्।।

- मंत्र जप के बाद देवी को नैवेद्य लगाकर विवाह समस्या को दूर करने की प्रार्थना करें

लड़के के शीघ्र विवाह के लिए अचूक टोटका

हर माता-पिता की इच्छा होता है कि उनके बेटे का विवाह धूम-धाम से हो। लेकिन कभी-कभी कुछ कारणों के चलते उचित समय पर उसका विवाह नहीं हो पाता। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे टोटके से इस समस्या का निदान संभव है

टोटका

कुम्हार अपने चाक को जिस डंडे से घुमाता है, उसे किसी तरह किसी को बिना बताए प्राप्त कर लें। इसके बाद घर के किसी कोने को रंग-रोगन कर साफ कर लें। इस स्थान पर उस डंडे को लंहगा-चुनरी व सुहाग का अन्य सामग्री से सजाकर दुल्हन का स्वरूप देकर एक कोने में खड़ करके गुड़ और चावलों से इसकी पूजा करें। इससे लड़के का विवाह शीघ्र ही हो जाता है। यदि चालीस दिनों में इच्छा पूरी न हो तो फिर यही प्रक्रिया दोहराएं(डंडा प्राप्त करने से लेकर पूजा तक)। यह प्रक्रिया सात बार कर सकते हैं

क्या आपको अपना घर चाहिए? यह उपाय करें

घर या मकान, जहां हम हमारे प्रियजनों के साथ रहते हैं। सभी का सपना होता है कि उनका अपना सुंदर सा घर हो। इस सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की जाती है लेकिन फिर भी काफी लोग खुद का आशियाना बनाने में सफल नहीं हो पाते। ज्योतिष के अनुसार यदि कुंडली में मंगल या शनि से संबंधित कोई ग्रह दोष हो तो यह सपना पूरा करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाने से ऐसे सभी ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो जाता है जिनकी वजह से खुद का घर बनाने में कठिनाइयों को झेलना पड़ता है।

यदि किसी कारणवश आप अपना मकान नहीं बनवा पा रहे हैं या नया मकान नहीं खरीद पा रहे है, तो नीम की लकड़ी का एक छोटा सा घर बनवाकर किसी गरीब बच्चे को दान कर दें या किसी मंदिर में रख आएं। ऐसा करने पर शीघ्र ही आपको घर मिलने के योग बनेंगे। ध्यान रहें इसके साथ ही आप अपने प्रयास भी पूरी ईमानदारी से करें

वशीकरण

सम्मोहन शक्तिवर्द्धक सरल उपाय :

१. मोर की कलगी रेश्मी वस्त्र में बांधकर जेब में रखने से सम्मोहन शक्ति बढ़ती है।
२. श्वेत अपामार्ग की जड़ को घिसकर तिलक करने से सम्मोहन शक्ति बढ़ती है।
३. स्त्रियां अपने मस्तक पर आंखों के मध्य एक लाल बिंदी लगाकर उसे देखने का प्रयास करें। यदि कुछ समय बाद बिंदी खुद को दिखने लगे तो समझ लें कि आपमें सम्मोहन शक्ति जागृत हो गई है।
४. गुरुवार को मूल नक्षत्र में केले की जड़ को सिंदूर में मिलाकर पीस कर रोजाना तिलक करने से आकर्षण शक्ति बढ़ती है।
५. गेंदे का फूल, पूजा की थाली में रखकर हल्दी के कुछ छींटे मारें व गंगा जल के साथ पीसकर माथे पर तिलक लगाएं आकर्षण शक्ति बढ़ती है।
६. कई बार आपको यदि ऐसा लगता है कि परेशानियां व समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। धन का आगमन रुक गया है या आप पर किसी द्वारा तांत्रिक अभिकर्म'' किया गया है तो आप यह टोटके अवश्य प्रयोग करें, आपको इनका प्रभाव जल्दी ही प्राप्त होगा।
तांत्रिक अभिकर्म से प्रतिरक्षण हेतु उपाय
१. पीली सरसों, गुग्गल, लोबान व गौघृत इन सबको मिलाकर इनकी धूप बना लें व सूर्यास्त के 1 घंटे भीतर उपले जलाकर उसमें डाल दें। ऐसा २१ दिन तक करें व इसका धुआं पूरे घर में करें। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।
२. जावित्री, गायत्री व केसर लाकर उनको कूटकर गुग्गल मिलाकर धूप बनाकर सुबह शाम २१ दिन तक घर में जलाएं। धीरे-धीरे तांत्रिक अभिकर्म समाप्त होगा।
३. गऊ, लोचन व तगर थोड़ी सी मात्रा में लाकर लाल कपड़े में बांधकर अपने घर में पूजा स्थान में रख दें। शिव कृपा से तमाम टोने-टोटके का असर समाप्त हो जाएगा।
४. घर में साफ सफाई रखें व पीपल के पत्ते से ७ दिन तक घर में गौमूत्र के छींटे मारें व तत्पश्चात् शुद्ध गुग्गल का धूप जला दें।
५. कई बार ऐसा होता है कि शत्रु आपकी सफलता व तरक्की से चिढ़कर तांत्रिकों द्वारा अभिचार कर्म करा देता है। इससे व्यवसाय बाधा एवं गृह क्लेश होता है अतः इसके दुष्प्रभाव से बचने हेतु सवा 1 किलो काले उड़द, सवा 1 किलो कोयला को सवा 1 मीटर काले कपड़े में बांधकर अपने ऊपर से २१ बार घुमाकर शनिवार के दिन बहते जल में विसर्जित करें व मन में हनुमान जी का ध्यान करें। ऐसा लगातार ७ शनिवार करें। तांत्रिक अभिकर्म पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा।
६. यदि आपको ऐसा लग रहा हो कि कोई आपको मारना चाहता है तो पपीते के २१ बीज लेकर शिव मंदिर जाएं व शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाकर धूप बत्ती करें तथा शिवलिंग के निकट बैठकर पपीते के बीज अपने सामने रखें। अपना नाम, गौत्र उच्चारित करके भगवान् शिव से अपनी रक्षा की गुहार करें व एक माला महामृत्युंजय मंत्र की जपें तथा बीजों को एकत्रित कर तांबे के ताबीज में भरकर गले में धारण कर लें।
७. शत्रु अनावश्यक परेशान कर रहा हो तो नींबू को ४ भागों में काटकर चौराहे पर खड़े होकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए चारों दिशाओं में एक-एक भाग को फेंक दें व घर आकर अपने हाथ-पांव धो लें। तांत्रिक अभिकर्म से छुटकारा मिलेगा।
८. शुक्ल पक्ष के बुधवार को ४ गोमती चक्र अपने सिर से घुमाकर चारों दिशाओं में फेंक दें तो व्यक्ति पर किए गए तांत्रिक अभिकर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है।


सिद्ध वशीकरण मन्त्र

१॰ “बारा राखौ, बरैनी, मूँह म राखौं कालिका। चण्डी म राखौं मोहिनी, भुजा म राखौं जोहनी। आगू म राखौं सिलेमान, पाछे म राखौं जमादार। जाँघे म राखौं लोहा के झार, पिण्डरी म राखौं सोखन वीर। उल्टन काया, पुल्टन वीर, हाँक देत हनुमन्ता छुटे। राजा राम के परे दोहाई, हनुमान के पीड़ा चौकी। कीर करे बीट बिरा करे, मोहिनी-जोहिनी सातों बहिनी। मोह देबे जोह देबे, चलत म परिहारिन मोहों। मोहों बन के हाथी, बत्तीस मन्दिर के दरबार मोहों। हाँक परे भिरहा मोहिनी के जाय, चेत सम्हार के। सत गुरु साहेब।”
विधि- उक्त मन्त्र स्वयं सिद्ध है तथा एक सज्जन के द्वारा अनुभूत बतलाया गया है। फिर भी शुभ समय में १०८ बार जपने से विशेष फलदायी होता है। नारियल, नींबू, अगर-बत्ती, सिन्दूर और गुड़ का भोग लगाकर १०८ बार मन्त्र जपे।
मन्त्र का प्रयोग कोर्ट-कचहरी, मुकदमा-विवाद, आपसी कलह, शत्रु-वशीकरण, नौकरी-इण्टरव्यू, उच्च अधीकारियों से सम्पर्क करते समय करे। उक्त मन्त्र को पढ़ते हुए इस प्रकार जाँए कि मन्त्र की समाप्ति ठीक इच्छित व्यक्ति के सामने हो।

२॰ शूकर-दन्त वशीकरण मन्त्र
“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं वाराह-दन्ताय भैरवाय नमः।”
विधि- ‘शूकर-दन्त’ को अपने सामने रखकर उक्त मन्त्र का होली, दीपावली, दशहरा आदि में १०८ बार जप करे। फिर इसका ताबीज बनाकर गले में पहन लें। ताबीज धारण करने वाले पर जादू-टोना, भूत-प्रेत का प्रभाव नहीं होगा। लोगों का वशीकरण होगा। मुकदमें में विजय प्राप्ति होगी। रोगी ठीक होने लगेगा। चिन्ताएँ दूर होंगी और शत्रु परास्त होंगे। व्यापार में वृद्धि होगी।

३॰ कामिया सिन्दूर-मोहन मन्त्र-
“हथेली में हनुमन्त बसै, भैरु बसे कपार।
नरसिंह की मोहिनी, मोहे सब संसार।
मोहन रे मोहन्ता वीर, सब वीरन में तेरा सीर।
सबकी नजर बाँध दे, तेल सिन्दूर चढ़ाऊँ तुझे।
तेल सिन्दूर कहाँ से आया ? कैलास-पर्वत से आया।
कौन लाया, अञ्जनी का हनुमन्त, गौरी का गनेश लाया।
काला, गोरा, तोतला-तीनों बसे कपार।
बिन्दा तेल सिन्दूर का, दुश्मन गया पाताल।
दुहाई कमिया सिन्दूर की, हमें देख शीतल हो जाए।
सत्य नाम, आदेश गुरु की। सत् गुरु, सत् कबीर।
विधि- आसाम के ‘काम-रुप कामाख्या, क्षेत्र में ‘कामीया-सिन्दूर’ पाया जाता है। इसे प्राप्त कर लगातार सात रविवार तक उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करें। इससे मन्त्र सिद्ध हो जाएगा। प्रयोग के समय ‘कामिया सिन्दूर’ पर ७ बार उक्त मन्त्र पढ़कर अपने माथे पर टीका लगाए। ‘टीका’ लगाकर जहाँ जाएँगे, सभी वशीभूत होंगे।

आकर्षण एवं वशीकरण के प्रबल सूर्य मन्त्र
१॰ “ॐ नमो भगवते श्रीसूर्याय ह्रीं सहस्त्र-किरणाय ऐं अतुल-बल-पराक्रमाय नव-ग्रह-दश-दिक्-पाल-लक्ष्मी-देव-वाय, धर्म-कर्म-सहितायै ‘अमुक’ नाथय नाथय, मोहय मोहय, आकर्षय आकर्षय, दासानुदासं कुरु-कुरु, वश कुरु-कुरु स्वाहा।”
विधि- सुर्यदेव का ध्यान करते हुए उक्त मन्त्र का १०८ बार जप प्रतिदिन ९ दिन तक करने से ‘आकर्षण’ का कार्य सफल होता है।
२॰ “ऐं पिन्स्थां कलीं काम-पिशाचिनी शिघ्रं ‘अमुक’ ग्राह्य ग्राह्य, कामेन मम रुपेण वश्वैः विदारय विदारय, द्रावय द्रावय, प्रेम-पाशे बन्धय बन्धय, ॐ श्रीं फट्।”
विधि- उक्त मन्त्र को पहले पर्व, शुभ समय में २०००० जप कर सिद्ध कर लें। प्रयोग के समय ‘साध्य’ के नाम का स्मरण करते हुए प्रतिदिन १०८ बार मन्त्र जपने से ‘वशीकरण’ हो जाता है।

बजरङग वशीकरण मन्त्र
“ॐ पीर बजरङ्गी, राम लक्ष्मण के सङ्गी। जहां-जहां जाए, फतह के डङ्के बजाय। ‘अमुक’ को मोह के, मेरे पास न लाए, तो अञ्जनी का पूत न कहाय। दुहाई राम-जानकी की।”
विधि- ११ दिनों तक ११ माला उक्त मन्त्र का जप कर इसे सिद्ध कर ले। ‘राम-नवमी’ या ‘हनुमान-जयन्ती’ शुभ दिन है। प्रयोग के समय दूध या दूध निर्मित पदार्थ पर ११ बार मन्त्र पढ़कर खिला या पिला देने से, वशीकरण होगा।

आकर्षण हेतु हनुमद्-मन्त्र-तन्त्र
“ॐ अमुक-नाम्ना ॐ नमो वायु-सूनवे झटिति आकर्षय-आकर्षय स्वाहा।”
विधि- केसर, कस्तुरी, गोरोचन, रक्त-चन्दन, श्वेत-चन्दन, अम्बर, कर्पूर और तुलसी की जड़ को घिस या पीसकर स्याही बनाए। उससे द्वादश-दल-कलम जैसा ‘यन्त्र’ लिखकर उसके मध्य में, जहाँ पराग रहता है, उक्त मन्त्र को लिखे। ‘अमुक’ के स्थान पर ‘साध्य’ का नाम लिखे। बारह दलों में क्रमशः निम्न मन्त्र लिखे- १॰ हनुमते नमः, २॰ अञ्जनी-सूनवे नमः, ३॰ वायु-पुत्राय नमः, ४॰ महा-बलाय नमः, ५॰ श्रीरामेष्टाय नमः, ६॰ फाल्गुन-सखाय नमः, ७॰ पिङ्गाक्षाय नमः, ८॰ अमित-विक्रमाय नमः, ९॰ उदधि-क्रमणाय नमः, १०॰ सीता-शोक-विनाशकाय नमः, ११॰ लक्ष्मण-प्राण-दाय नमः और १२॰ दश-मुख-दर्प-हराय नमः।
यन्त्र की प्राण-प्रतिष्ठा करके षोडशोपचार पूजन करते हुए उक्त मन्त्र का ११००० जप करें। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए लाल चन्दन या तुलसी की माला से जप करें। आकर्षण हेतु अति प्रभावकारी है।

वशीकरण हेतु कामदेव मन्त्र
“ॐ नमः काम-देवाय। सहकल सहद्रश सहमसह लिए वन्हे धुनन जनममदर्शनं उत्कण्ठितं कुरु कुरु, दक्ष दक्षु-धर कुसुम-वाणेन हन हन स्वाहा।”
विधि- कामदेव के उक्त मन्त्र को तीनों काल, एक-एक माला, एक मास तक जपे, तो सिद्ध हो जायेगा। प्रयोग करते समय जिसे देखकर जप करेंगे, वही वश में होगा।


प्रेमी-प्रेमिका वशीकरण मंत्र (Premi premika vashikaran mantra)

'कामाख्‍या देश कामाख्‍या देवी,
जहॉं बसे इस्‍माइल जोगी,
इस्‍माइल जोगी ने लगाई फुलवारी,
फूल तोडे लोना चमारी,
जो इस फूल को सूँघे बास,
तिस का मन रहे हमारे पास,
महल छोडे, घर छोडे, आँगन छोडे,
लोक कुटुम्‍ब की लाज छोडे,
दुआई लोना चमारी की,
धनवन्‍तरि की दुहाई फिरै।'

''किसी भी शनिवार से शुरू करके 31 दिनों तक नित्‍य 1144 बार मंत्र का जाप करें तथा लोबान, दीप और शराब रखें, फिर किसी फूल को 50 बार अभिमंत्रित करके स्‍त्री को दे दें। वह उस फूल को सूँघते ही वश में हो जाएगी।''

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ऐं पिन्स्थां कलीं काम-पिशाचिनी शिघ्रं ‘अमुक’ ग्राह्य ग्राह्य, कामेन मम रुपेण वश्वैः विदारय विदारय, द्रावय द्रावय, प्रेम-पाशे बन्धय बन्धय, ॐ श्रीं फट्।”


विधि- उक्त मन्त्र को पहले पर्व, शुभ समय में २०००० जप कर सिद्ध कर लें। प्रयोग के समय ‘साध्य’ के नाम का स्मरण करते हुए प्रतिदिन १०८ बार मन्त्र जपने से ‘वशीकरण’ हो जाता है


सफेद गुंजा की जड़ को घिस कर माथे पर तिलक लगाने से सभी लोग वशीभूत हो जाते हैं।

यदि सूर्य ग्रहण के समय सहदेवी की जड़ और सफेद चंदन को घिस कर व्यक्ति तिलक करे तो देखने वाली स्त्री वशीभूत हो जाएगी।

राई और प्रियंगु को ÷ह्रीं' मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करके किसी स्त्री के ऊपर डाल दें तो वह वश में हो जाएगी।

शनिवार के दिन सुंदर आकृति वाली एक पुतली बनाकर उसके पेट पर इच्छित स्त्री का नाम लिखकर उसी को दिखाएं जिसका नाम लिखा है। फिर उस पुतली को छाती से लगाकर रखें। इससे स्त्री वशीभूत हो जाएगी।

बिजौरे की जड़ और धतूरे के बीज को प्याज के साथ पीसकर जिसे सुंघाया जाए वह वशीभूत हो जाएगा।

नागकेसर को खरल में कूट छान कर शुद्ध घी में मिलाकर यह लेप माथे पर लगाने से वशीकरण की शक्ति उत्पन्न हो जाती है।

नागकेसर, चमेली के फूल, कूट, तगर, कुंकुंम और देशी घी का मिश्रण बनाकर किसी प्याली में रख दें। लगातार कुछ दिनों तक नियमित रूप से इसका तिलक लगाते रहने से वशीकरण की शक्ति उत्पन्न हो जाती है।

शुभ दिन एवं शुभ लग्न में सूर्योदय के पश्चात उत्तर की ओर मुंह करके मूंगे की माला से निम्न मंत्र का जप शुरू करें। ३१ दिनों तक ३ माला का जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है। मंत्र सिद्ध करके वशीकरण तंत्र की किसी भी वस्तु को टोटके के समय इसी मंत्र से २१ बार अभिमंत्रित करके इच्छित व्यक्ति पर प्रयोग करें। अमुक के स्थान पर इच्छित व्यक्ति का नाम बोलें। वह व्यक्ति आपके वश में हो जाएगा। मंत्र इस प्रकार है -

ऊँ नमो भास्कराय त्रिलोकात्मने अमुक महीपति मे वश्यं कुरू कुरू स्वाहा।

रवि पुष्य योग (रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र) में गूलर के फूल एवं कपास की रूई मिलाकर बत्ती बनाएं तथा उस बत्ती को मक्खन से जलाएं। फिर जलती हुई बत्ती की ज्वाला से काजल निकालें। इस काजल को रात में अपनी आंखें में लगाने से समस्त जग वश में हो जाता है। ऐसा काजल किसी को नहीं देना चाहिए।

अनार के पंचांग में सफेद घुघची मिला-पीसकर तिलक लगाने से समस्त संसार वश में हो जाता है।

कड़वी तूंबी (लौकी) के तेल और कपड़े की बत्ती से काजल तैयार करें। इसे आंखों में लगाकर देखने से वशीकरण हो जाता है।

बिल्व पत्रों को छाया में सुखाकर कपिला गाय के दूध में पीस लें। इसका तिलक करके साधक जिसके पास जाता है, वह वशीभूत हो जाता है।

कपूर तथा मैनसिल को केले के रस में पीसकर तिलक लगाने से साधक को जो भी देखता है, वह वशीभूत हो जाता है।

केसर, सिंदूर और गोरोचन तीनों को आंवले के साथ पीसकर तिलक लगाने से देखने वाले वशीभूत हो जाते हैं।

श्मशान में जहां अन्य पेड़ पौधे न हों, वहां लाल गुलाब का पौधा लगा दें। इसका फूल पूर्णमासी की रात को ले आएं। जिसे यह फूल देंगे, वह वशीभूत हो जाएगा। शत्रु के सामने यह फूल लगाकर जाने पर वह अहित नहीं करेगा।

अमावस्या की रात्रि को मिट्टी की एक कच्ची हंडिया मंगाकर उसके भीतर सूजी का हलवा रख दें। इसके अलावा उसमें साबुत हल्दी का एक टुकड़ा, ७ लौंग तथा ७ काली मिर्च रखकर हंडिया पर लाल कपड़ा बांध दें। फिर घर से कहीं दूर सुनसान स्थान पर वह हंडिया धरती में गाड़ दें और वापस आकर अपने हाथ-पैर धो लें। ऐसा करने से प्रबल वशीकरण होता है।

प्रातःकाल काली हल्दी का तिलक लगाएं। तिलक के मध्य में अपनी कनिष्ठिका उंगली का रक्त लगाने से प्रबल वशीकरण होता है।

कौए और उल्लू की विष्ठा को एक साथ मिलाकर गुलाब जल में घोटें तथा उसका तिलक माथे पर लगाएं। अब जिस स्त्री के सम्मुख जाएगा, वह सम्मोहित होकर जान तक न्योछावर करने को उतावली हो जाएगी।


उपाय !


१. यदि शत्रु अनावश्यक परेशान कर रहा हो तो भोजपत्र का टुकड़ा लेकर उस पर लाल चंदन से शत्रु का नाम लिखकर शहद की डिब्बी में डुबोकर रख दें। शत्रु वश में आ जाएगा।

२. काले कमल, भवरें के दोनों पंख, पुष्कर मूल, श्वेत काकजंघा - इन सबको पीसकर सुखाकर चूर्ण बनाकर जिस पर डाले वह वशीभूत होगा।

३. छोटी इलायची, लाल चंदन, सिंदूर, कंगनी , काकड़सिंगी आदि सारी सामग्री को इक्ट्ठा कर धूप बना दें व जिस किसी स्त्री के सामने धूप देगें वह वशीभूत होगी।

४. काकजंघा, तगर, केसर इन सबको पीसकर स्त्री के मस्तक पर तथा पैर के नीचे डालने पर वह वशीभूत होती है।

५. तगर, कूठ, हरताल व केसर इनको समान भाग में लेकर अनामिका अंगुली के रक्त में पीसकर तिलक लगाकर जिसके सम्मुख आएंगे वह वशीभूत हो जाएगा। ज्यादातर सभावशीकरण करने के लिए यह प्रयोग किया जाता है।

६. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में अनार की लकड़ी तोड़कर लाएं व धूप देकर उसे अपनी दांयी भुजा में बांध लें तो प्रत्येक व्यक्ति वशीभूत होगा।

७. शुक्ल पक्ष के रविवार को ५ लौंग शरीर में ऐसे स्थान पर रखें जहां पसीना आता हो व इसे सुखाकर चूर्ण बनाकर दूध, चाय में डालकर जिस किसी को पिला दी जाए तो वह वश में हो जाता है।

८. पीली हल्दी, घी (गाय का), गौमूत्र, सरसों व पान के रस को एक साथ पीसकर शरीर पर लगाने से स्त्रियां वश में हो जाती है।

९. बैजयंति माला धारण करने से शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करने लगते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने यह माला पहनी हुई थी व उन्हें यह अतिप्रिय थी व उनमें सबको मोहित करने की अद्भुत क्षमता भी थी।

१०. कई बार पति किसी दूसरी स्त्री के चंगुल में आ जाता है तो अपनी गृहस्थी बचाने के लिए स्त्रियां यह प्रयोग कर सकती हैं। गुरुवार रात १२ बजे पति के थोड़े से बाल काटकर जला दें व बाद में पैर से मसल दें अवश्य ही जल्दी ही पति सुधर जाएगा।

११. कनेर पुष्प व गौघृत दोनों को मिलाकर, वशीकरण यंत्र रखें व आकर्षण मंत्र का जप करें। जिसका नाम लेकर १०८ बार जप करेंगे तो वह सात दिन के अंदर वशीभूत हो जाएगा।

देवी मंत्र द्वारा वशीकरण


वशीकरण का सामान्य और सरल अर्थ है- किसी को प्रभावित करना, आकर्षित करना या वश में करना। जीवन में ऐसे कई मोके आते हैं जब इंसान को ऐसे ही किसी उपाय की जरूरत पड़ती है। किसी रूठें हुए को मनाना हो या किसी अपने के अनियंत्रित होने पर उसे फिर से अपने नियंत्रण में लाना हो,तब ऐसे ही किसी उपाय की सहायता ली जा सकती है। वशीकरण के लिये यंत्र, तंत्र, और मंत्र तीनों ही प्रकार के प्रयोग किये जा सकते हैं। यहां हम ऐसे ही एक अचूक मंत्र का प्रयोग बता रहे हैं। यह मंत्र दुर्गा सप्तशती का अनुभव सिद्ध मंत्र है। यह मंत्र तथा कुछ निर्देश इस प्रकार हैं-



ज्ञानिनामपि चेतांसि, देवी भगवती ही सा। बलादाकृष्य मोहाय, महामाया प्रयच्छति ।। यह एक अनुभवसिद्ध अचूक मंत्र है। इसका प्रयोग करने से पूर्व भगवती त्रिपुर सुन्दरी मां महामाया का एकाग्रता पूर्वक ध्यान करें। ध्यान के पश्चात पूर्ण श्रृद्धा-भक्ति से पंचोपचार से पूजा कर संतान भाव से मां के समक्ष अपना मनोरथ व्यक्त कर दें। वशीकरण सम्बंधी प्रयोगों में लाल रंग का विशेष महत्व होता है अत: प्रयोग के दोरान यथा सम्भव लाल रंग का ही प्रयोग करें। मंत्र का प्रयोग अधार्मिक तथा अनैतिक उद्देश्य के लिये करना सर्वथा वर्जित है।


आकर्षण एवं वशीकरण के प्रबल सूर्य मन्त्र


“ॐ नमो भगवते श्रीसूर्याय ह्रीं सहस्त्र-किरणाय ऐं अतुल-बल-पराक्रमाय नव-ग्रह-दश-दिक्-पाल-लक्ष्मी-देव-वाय, धर्म-कर्म-सहितायै ‘अमुक’ नाथय नाथय, मोहय मोहय, आकर्षय आकर्षय, दासानुदासं कुरु-कुरु, वश कुरु-कुरु स्वाहा।”

विधि- सुर्यदेव का ध्यान करते हुए उक्त मन्त्र का १०८ बार जप प्रतिदिन ९ दिन तक करने से ‘आकर्षण’ का कार्य सफल होता है।

“ऐं पिन्स्थां कलीं काम-पिशाचिनी शिघ्रं ‘अमुक’ ग्राह्य ग्राह्य, कामेन मम रुपेण वश्वैः विदारय विदारय, द्रावय द्रावय, प्रेम-पाशे बन्धय बन्धय, ॐ श्रीं फट्।”

विधि- उक्त मन्त्र को पहले पर्व, शुभ समय में २०००० जप कर सिद्ध कर लें। प्रयोग के समय ‘साध्य’ के नाम का स्मरण करते हुए प्रतिदिन १०८ बार मन्त्र जपने से ‘वशीकरण’ हो जाता है।


मुस्लिम वशीकरण-प्रयोग


१॰ “आगिशनी माल खानदानी। इन्नी अम्मा, हव्वा यूसुफ जुलैखानी। ‘फलानी’ मुझ पै हो दीवानी। बरहक अब्दुल कादर जीलानी।”
विधिः- पूरा प्रयोग २१ दिन का है, किन्तु ११ दिन में ही इसका प्रभाव दिखाई देने लगता है। इस प्रयोग का दुरुपयोग कदापि नहीं करना चाहिए, अन्यथा स्वयं को भी हानि हो सकती है। साधना-काल में मांस, मछली, लहसुन, प्याज, दूध, दही, घी आदि वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन कर साधना करनी चाहिए। पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लम्बी धोती या स्वच्छ वस्त्र को ‘अहराना’ की तरह बाँध कर साधना करनी चाहिए। शेष बची हुई धोती या कपड़े को शरीर पर लपेटते हुए सिर को ढँक लेना चाहिए। एक ही कपड़े से पूरा शरीर ढँकना चाहिए, जैसे हिन्दू-स्त्रियाँ पहनती है।
उक्त मन्त्र की साधना रात्रि में, जब ‘नमाज’ आदि का समय समाप्त हो जाता है, तब करनी चाहिए। साधना करने से पहले मुसलमानी विधि से वजू करे। हो सके, तो नहा ले। जप या तो हिन्दू-विधि से करे या मुसलमानी विधि से। हिन्दू-विधि में माला का दाने अपनी तरफ घुमाए जाते हैं। मुसलमानी विधि में माला के दाने अपनी तरफ से आगे की ओर खिसकाए जाते हैं। प्रतिदिन ११०० बार जप करे। यदि ११ दिन से पहले ‘साध्य’ आ जाए, तो न तो अधिक घुल-मिल कर बात करे, न ही किसी प्रकार का क्रोध करे। कोई बहाना बनाकर उसके पास से हट जाए। यदि ११ दिन में कार्य न हो तो २१ दिन तक जप करे। मन्त्र में ‘फलानी’ की जगह ‘साध्या’ का नाम लेना चाहिए।

२॰ “काला मयींयो इल इजामा वहैया रमीम।”
विधिः-
उक्त मन्त्र ‘कुरान शरीफ’ के २३वें ‘पारे’ में है। इस मन्त्र का दुरुपयोग कदापि न करे, अन्यथा स्वयं की हानि हो सकती है।
साधना में एक मिट्टी का चौड़ा बर्तन रखे। बर्तन में हवा जाने के लिए नीचे की ओर दो-चार छोटे-छोटे छेद करे। बर्तन में आम की लकड़ी के कोयले भर दें। कुछ कोयले अलग रख ले। बर्तन के कोयले जला कर एक बार ‘बिस्मिल्लाह’ एढ़े और ग्यारह बार ‘दरुद शरीफ’ पढ़े तथा खुदा से ‘प्रयोग’ की सफलता हेतु दुआ करे। फिर बाँएँ हाथ में एक काली मिर्च तथा दाहिने हाथ में माला लेकर उक्त मन्त्र ४० बार पढ़े। काली मिर्च और कोयले को फूँक मारते हुए मिट्टी के बर्तन में जलते हुए कोयले पर डाले। यदि ‘साध्य’ का नाम ज्ञात हो, तो उसका नाम कभी-कभी ले ले। अन्यथा उसका स्मरण करे। इस प्रकार ११ दिनों तक करे। यदि बीच में ‘साध्य’ आ जाए, तो भी ११ दिन तक ‘प्रयोग’ करे। अधूरा न छोड़े।

३॰ “बिस्मिल्लाहे रहेमानिर्रहीम, आलमोती होवल्लाह।”
विधिः- शुक्रवार से जप प्रारम्भ करे, लोहबान की धूप दे। कान में ‘गुलाब के इत्र’ का फाहा लगाए। ४० दिनों तक रात्रि के समय नित्य एक माला जप करे। प्रयोग के समय सात बार किसी खाने-पीने की वस्तु पर फूँक मारकर खिलाए। इससे किसी को भी वश में किया जा सकता है।

४॰ “बिस्मिल्लाहे रहेमानिर्रहीम सलामुन, कौलुनमि-नरर्विवरहीम तनजोलुल अजिजुर्रहीम।”
विधिः- उक्त मन्त्र के अनुसार प्रयोग के समय एक बार ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़कर अपने हाथों की दोनों हथेलियों पर फूँक मारकर अपने चेहरे पर इन हथेलियों को फेरे। जहाँ जाएँगे, लोग वशीभूत होंगे।

५॰ “बिस्मिल्लाह हवाना कुलु अल्ला, हथगाना दिल है सख। तुम हो दाना, हमारे बीच फलाने/फलानी को करो दिवाना।”
विधिः- शुक्रवार से प्रारम्भ करे। लोहबान जलता रहे। २१ बार ‘बिनौला’ लेकर, प्रत्येक बिनौला पर २१ बार उक्त मन्त्र पढ़कर फूँक मारे। फलाने/फलानी की जगह जिसे वश में करना है, उसका नाम ले। फिर उन बिनौलों को आग में डाल दे। ऐसा सात शुक्रवार तक करे। यह मन्त्र उसी अवस्था में काम करेगा, जब एक-दूसरे को जानते-पहचानते हों